बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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४९८ बृहत्संहिता
उपरिचर वसु द्वारा चलाई हुई और सदा राजाओं से की हुई इस विधि को करके
राजा शत्रुकृत भय को नहीं प्राप्त कर पाता है।।६८।।
इति 'विमला' हिन्दीटीकायामिन्द्रध्वजसम्पदध्यायस्त्रिचत्वारिंशः ॥४३॥
इमं विधिं पार्थिवो राजा अनुमन्य तमिन्द्रध्वजं सम्पूज्य न क्वचिदपि रिपुकृतं शत्रु-
कृतं भयं प्राप्नुयात्। कीदृशं विधिम्? उपरिचरवसुप्रवर्तितम्, उपरिचरेणोर्ध्वगामिना वसुना
राज्ञा प्रवर्तितम्। तथा नृपतिभी राजभिरप्यनुसन्ततमविच्छिन्नं कृतमिति।।६८।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृत्ताविन्द्रध्वज-
सम्पन्नाम त्रिचत्वारिंशोध्यायः ॥४३॥
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