बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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४५८ बृहत्संहिता
नीचचौरांश्च हन्यात् स अस्तमेति दिवाकरे।
प्रथमे प्रहरे सस्यान्यर्द्धरात्रे तु राक्षसान्।।
रात्रित्रिभागे वैश्यांश्च प्रत्यूषे चाहितो भवेत्।
यां दिशं चाभिहन्येत निर्घातो भैरवः स्वनः।।
तद्देश्यान् हन्ति देशांश्च सर्वदिग्भक्तयस्तथा।। इति।।२-५।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ निर्घातलक्षणं
नामैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः॥३९॥
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