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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

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पीतवर्णप्रतिसूर्यस्य शुभा- | कर्कट-सिंहयोर्द्रव्याणि ४६६
शुभफलम् ४५२ | कन्या-तुलयोर्द्रव्याणि ४६६
दक्षिणोत्तरदिक्स्थितप्रतिसूर्यस्य | वृश्चिक-धनुषोर्द्रव्याणि ४६७
शुभाशुभफलम् ४५२ | मकर-कुम्भयोर्द्रव्याणि ४६७
३८. रजोलक्षणाध्याय: | मीनराशेर्द्रव्याणि ४६७
रजोलक्षणेन राज्ञो नाश: ४५४ | राशिद्रव्याणां शुभाशुभफलम् ४६८
रज:प्रभवेन तद्विनाशे च फलम् ४५४ | राशिद्रव्ये विशेष: ४६९
घनौघरज:फलम् ४५४ | ४२. अर्घकाण्डाध्याय:
एकाधिकदिनरज:च्छन्नाकाशफलम् ४५४ | अर्घकाण्डप्रयोजनप्रदर्शनम् ४७१
रात्रिपर्यन्तरजोव्याप्ताकाशफलम् ४५४ | मेष-वृषस्थे सूर्ये करणीयम् ४७१
रज:समूहेन परचक्रागमयोग: ४५४ | मिथुनस्थे सूर्ये करणीयम् ४७२
त्रिरात्रिपर्यन्तरजोवर्षणफलम् ४५५ | कर्कटस्थे सूर्ये करणीयम् ४७२
केतूद्यानन्तरजोवर्षणफलम् ४५५ | सिंहस्थे सूर्ये करणीयम् ४७२
३९. निर्घातलक्षणाध्याय: | कन्यागते सूर्ये करणीयम् ४७३
निर्घातलक्षणम् ४५६ | तुलागते सूर्ये करणीयम् ४७३
वेलावशेन निर्घातलक्षणम् ४५६ | वृश्चिकगते सूर्ये करणीयम् ४७३
४०. सस्यजातकाध्याय: | धनुगते सूर्ये करणीयम् ४७३
आगमप्रदर्शनम् ४५९ | मकर-कुम्भगते सूर्ये करणीयम् ४७४
ग्रैष्मिकधान्यवृद्धियोग: ४५९ | मीनगते सूर्ये करणीयम् ४७४
ग्रहस्थित्या ग्रैष्मिकधान्यवृद्धियोग: ४६० | प्रतिराशिगते सूर्ये विशेष: ४७४
ग्रहस्थित्या ग्रैष्मिकधान्यनिष्पत्ति: ४६० | ४३. इन्द्रध्वजसम्पदाध्याय:
ग्रहस्थित्या धान्यनिष्पत्ति: ४६१ | इन्द्रध्वजोत्पत्तिप्रदर्शनम् ४७६
शारदधान्यस्थितिज्ञानप्रकार: ४६३ | देवानां कृते ब्रह्मण उपदेश: ४७६
रविचारवशेन ग्रैष्मिकधान्यस्य | देवैर्द्वारा नारायणस्तुति: ४७६
सामर्थ्यं महर्घताञ्च ४६३ | नारायणप्रदत्तध्वजस्वरूपम् ४७७
रविचारवशेन शारदधान्यस्य | इन्द्रद्वारा ध्वजस्योपयोग: ४७७
सामर्थ्यं महर्घताञ्च ४६४ | इन्द्रद्वारा चेदिपं प्रति दण्डप्रदानम् ४७८
४१. द्रव्यनिश्चयाध्याय: | इन्द्रप्रसादं ध्वजमाहात्म्यञ्च ४७८
आगमप्रदर्शनम् ४६५ | ध्वजविधानम् ४७९
मेषराशेर्द्रव्याणि ४६५ | इन्द्रध्वजाय वने शुभवृक्षकर्तनम् ४८०
वृष-मिथुनयोर्द्रव्याणि ४६५ | ध्वजाय शुभवृक्षा: ४८१
| शुभवृक्षवर्णनम् ४८१
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