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सर्वकोश
बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: प्रथम भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 1 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished728 पृष्ठ

पृष्ठ 155, कुल 728 में से

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पृष्ठ 155

राहुचाराध्यायः ११५
तथा च ऋषिपुत्रः—
यावतोंऽशान् ग्रसित्वेन्दोरुदयत्यस्तमेति वा।
तावतोंऽशान् पृथिव्यास्तु तम एव विनाशयेत्।।
उदयेऽस्तमये वापि सूर्यस्य ग्रहणं भवेत्।
तदा नृपभयं विन्द्यात् परचक्रस्य चागमम्।।
तथा च—
चिरं गृह्णाति सोमार्को सर्वं वा ग्रसतं यदा।
हन्यात् स्फीतान् जनपदान् वरिष्ठांश्च जनाधिपान्।।
ग्रैष्मेण तत्र जीवन्ति नराश्चाम्बुफलेन वा।
भयदुर्भिक्षरोगैश्च सम्पीड्यन्ते प्रजास्तथा।। इति।
सर्वग्रस्ताविति। सूर्येन्दू सर्वग्रस्तौ निःशेषाच्छादितौ तावेव यदि पापसन्दृष्टौ
पापग्रहयोरङ्गारकसौरयोरन्यतरेण दृष्टौ भवतस्तदा दुर्भिक्षं मरकं च ददाते इति।।२७।।
अथोदयात् प्रभृत्यस्तमयं यावद् ग्रस्तयोश्चन्द्रार्कयोः सप्तस्वाकाशभागेषु फलं श्लोक-
चतुष्टयेनाह—
अर्द्धोदितोपरक्तो नैकृतिकान् हन्ति सर्वयज्ञांश्च।
अग्न्युपजीविगुणाधिकविप्राश्रमिणो युगेऽभ्युदितः ।।२८।।
कर्षकपाखण्डिवणिक्क्षत्रियबलनायकान् द्वितीयांशे।
कारूकशूद्रम्लेच्छान् खतृतीयांशे समन्त्रिजनान् ।।२९।।
मध्याह्ने नरपतिमध्यदेशहा शोभनश्च धान्यार्घः।
तृणभुगमात्यान्तःपुरवैश्यघ्नः पञ्चमे खांशे ।।३०।।
स्त्रीशूद्रान् षष्ठेऽंशे दस्युप्रत्यन्तहाऽस्तमयकाले।
यस्मिन् खांशे मोक्षस्तत्रोक्तानां शिवं भवति ।।३१।।
यदि अर्द्धोदित चन्द्र और सूर्य ग्रस्त होता हो तो निषाद जाति का और समस्त यज्ञों का
नाश करता है। दिनमान या रात्रिमान को सात जगह विभक्त करने पर युग का प्रथम आदि
खांश मान होता है।
इनमें प्रत्येक खांश मान में स्पर्श और मोक्ष होने पर फल यह होता है कि यदि युग
के प्रथम खांश में उदित चन्द्र या सूर्य ग्रस्त होता हो तो अग्नि से जीविका चलाने वाले,
गुणी, ब्राह्मण और आश्रमवासियों का नाश करता है। द्वितीय खांश में किसान, पाखण्डी,
व्यापारी, क्षत्रिय और सेनापति का नाश करता है। तृतीय खांश में चित्र बनाने वाले, शूद्र,
म्लेच्छ जाति और मन्त्रियों का नाश करता है। चतुर्थ खांश में राजा और मध्य देश का
नाश करता है तथा अन्नों के मूल्य में समानता करता है। पञ्चम खांश में चतुष्पद, मन्त्री,
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