बृहत्संहिता (आचार्य वराहमिहिर - स्थापत्य, खगोल, मौसम व जल विज्ञान)
Brihat Samhita of Varahamihira with Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर / डॉ. सुरेशचन्द्र शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें11
Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka
किलिकिलिविरुतं lxxxviii 22 | ,, लजनविनाश lxxviii 10
किलिकिलिकिलि lxxxviii 21 | ,, लपांसन xvi 35
किष्किन्धकण्टक xiv 10 | ,, वलयवैडूर्याम्बुज xxx 20
किष्किषिशब्दः lxxxviii 16 | ,, शयुकाशर liii 95
कीटाम्बुमक्षि xcvii 7 | ,, सुमरसपान xlviii 7
कीर्तिर्लक्ष्मीर्धृतिः xlviii 57 | ,, हकावेशपिहित ii 15
कुकुटरुतंप्रदोषे xlvi 69 | कृपेनापस्मारो liii 76
,, :,टस्त्वृजुतनू lxiii 1 | कूर्मःप्रथमे liv 44
', ,, टीचमृदुचारु lxiii 3 | कूर्मवसासृक् l 22
,, ,, टेभपरित्य lxxxvi 20 | कृकलासकपि lxxix 25
कुक्षिकुचजठर li 31 | कृकलासकपि xciv 5
,, जविजिते xvii 23 | कृकलासकाक l 3
,, जेभिघातः civ 11 | कृकवाकुजीव xlviii 6
,, अरुतिगजपृष्ठः lvi 25 | कृत्वाप्रभूतं lvi 1
,, ट्कःकुटिलश्चैव lxv 9 | कृन्दारुणस्य liv 124
,, ड्थमुक्ति lxxxix 9 | कृत्वावलिंप्रभूतं lx 17
,, ज्नानुजातवल्ली lix 3 | कृत्स्नाङ्गोपाङ्ग ii 6
,, व्जोनाम्नायः lxix 35 | कृशदीर्घेदेशमं lviii 55
,, मुद्धतिकुमुद xi 43 | कृषिबीजगृहाश्रय c 4
,, म्भाधस्ताज्जङ्घा lxxix 30 | कुष्टांप्ररूढबीजां liii 96
,, म्मेगुरुर्गविशशीसूर्यो xl 7 | कृष्णचतुर्दश्य c 2
,, म्मेऽन्तर्गिरिजान् v 42 | कृष्णश्वेतकपीतक lxxxi 19
,, म्भोऽन्त्यधनिष्ठा cii 6 | कृष्णाःश्वेताःपीताः lxxxi 4
,, रूभूमिजाः xvi 31 | कृष्णोगलेऽस्यबिन्दुः xlv 3
,, रविन्दभवाः lxxxii 2 | केकेतिपूर्ण lxxxviii 25
,, र्यदिहनि xliii 51 | केचित्तुशकुनद्वार lxxxvi 53
,, र्याद्वारो xlviii 11 | केचिदनन्त xxxv 2
,, र्याङ्गवेशुभ c 3 | केचिद्यथामिवृष्टं xxiii 4
,, र्वन्तिभास्कर cii 2 | केचिद्वदन्तिकार्तिक xxi 5
,, र्वन्त्येताः xxxiii 20 | केतुकुजराहुशुक्रा xvii 7
| केत्वाद्युदय xxxviii 8