बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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दिनचर्याप्रकरणम्।
स्थानप्रद करणप्रदग्रहाणांफलम् -
अर्केन्दुगुरवः शुक्रः क्रमादन्येवलक्रमाद् ।
भवंति स्थानदाः खेटाश्चत्वारश्च यदैकदा ।।१।।
सूर्य चन्द्र गुरु शुक्र, भौम, बुध, शनि एक ही समय में स्थानप्रद हों तो धन
को लाभ होता है।।१।।
धनादीनां यथा लब्धिः पंच चेत्यूजयतायुतः ।
आरोग्यं वस्त्रलाभश्च षट्सु पट्टस्यवंधनम् ।।२।।
इनमें पांच स्थानद हों तो पूज्यता प्राप्त हो, यदि ६ स्थानद हों तो पट्टाभिषेक
होता है।।२।।
सप्तचेद्राऽयलाभः स्यादेवं करणदा यदि ।
धनहानिस्ततो व्याधिस्ततस्तु विपदादयः ।।३।।
सात ग्रह हों तो राज्यलाभ होता है। यदि चार करणप्रद हों तो धन की हानि,
पांच हों तो व्याधि, छ हों तो विपत्ति।।३।।
सप्तभिर्मरणं प्रोक्तमक्षाभावे मृतिर्भवेत् ।
तत्र तिष्ठति चेत्खेटे त्वन्यस्मिन्यदिवामतः ।।४।।
सात हों तो विपत्ति और मरण होता है। करण का अभाव हो तो मृत्यु यदि
विलोमग्रहस्थिति हो तो मृत्यु नहीं होती है।।४।।
उच्चसंख्याधिका अंशाश्चंद्रस्य स्थानदाःपरे ।
शुभाख्याः शुभदाः प्रोक्ता राशिनात्र क्रमात्फलम् ।।५।।
चन्द्रोच्च की संख्या १३ इससे यदि अधिक अंश के स्थानदग्रह हों और
शुभग्रह हों तो शुभफल होता है।।१-५।।
उपसंहारः-
होराशास्त्रमिदं सर्वं भाषितं तव सुव्रत ।
पुण्यं यशस्यं धन्यं च त्रिकालज्ञानकारणम् ।।६।।
हे मैत्रेय! यह सम्पूर्ण होरा शास्त्र मैंने कहा यह पुण्यकारक, यश को देने
वाला, धन धान्य को देने वाला, भूत, भविष्य और वर्तमान काल को कहने वाला
है।।६।।