बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें· ६८४ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
लग्न में गुरु, चौथे भाव में शुक्र, बुध पांचवें भाव में और छठें भाव में सूर्य
हो तो ९० वर्ष की आयु, यदि चंद्र, भौम, शनि ये तीनों ग्रह अपने शत्रुराशि और
अष्टमभाव को छोड़कर अन्यस्थान में बैठे हों तो ९६ वर्ष की आयु होती है।।४।।
सुखादिकेन्द्रेषु गुरुः स्थितश्चेत्तत्पंचमेज्ञे तु भृगौतुषष्ठे ।
षडुत्तरा सप्ततिरष्टयुक्ता त्वंशीतिरेकोत्तरतः प्रदिष्टा ।।५।।
चतुर्थ आदि केन्द्र में गुरु हों और गुरु से पाचवें भाव में बुध हों तथा छठें
भाव में शुक्र हो तो ७६ वर्ष की आयु होती है। सातवें भाव में गुरु हो और उससे
चौथे भाव में बुध शुक्र हों तो ८८ वर्ष की आयु होती है। तथा दशम भाव में
गुरु हों और उससे ५।६ भाव में क्रम से बुध शुक्र हों तो ८१ वर्ष की आयु होती
है।।५।।
केन्द्रादि आयुष्य-
केन्द्रादिस्थाः शतं दद्युर्नवाष्टादींश्च दिग्गुणान् ।
मिश्रं संयुज्य दलिता अनुपातेन वत्सराः ।।६।।
सभी ग्रह केन्द्र में हों तो १०० वर्ष की आयु, पणकर में हों तो ९० वर्ष
की आयु और सभी अपोक्लिम में हों तो ८० वर्ष की आयु होती है। यदि दो स्थान
में ग्रह हों तो दोनों स्थान की आयु के योग की आधी आयु होती है।।६।।
शत्रुनीच समाशेषु दिग्विधेषु न चेत्स्थिताः ।
शतायुर्योग हीनास्तु सर्वे प्रोक्ता कलौ युगे ।।७।।
यदि तीनों स्थानों में ग्रह हों तो तीनों के योग का तृतीयांश आयु वर्ष होता
है। यदि उक्त दशविध (३२ श्लो., ४ श्लो., ५ श्लो, ६ श्लो. में कहे हुये)
आयुष्य में कोई न हो तो गणितागतायु लेना। कलियुग में सभी मनुष्य १०० वर्ष
से अल्प आयुवाले होते हैं।।७।।
पूर्वोक्तायुषे हानिः-
दायानां हरणं वक्ष्ये शृणुष्व मुनिपुंगव ।
आयुर्दाये तु हरणं षड्विधं संप्रकीर्त्यते ।।८।।
हे मैत्रेय! आयु का हरण कहता हूँ उसे सुनो। वह हरण ६ प्रकार का होता
है।।८।।
व्ययादिहरणं पूर्वमस्तारिहरणं तथा ।
क्रूरोदयस्थ हरणं चन्द्रयुक्ततमस्तथा ।।९।।