बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ लोकयात्राप्रकरणम् । ६५१
अब्दादयस्तदा देहनाशः करणदे सति ।
तस्मिन् पापग्रहे तस्माद्वलिन्येवं विधिःस्मृतः ॥१९॥
लब्धि माता पिता के आयुष्य का प्रमाण होता है। यदि पापग्रह बलवान् हो
पूर्वविधि से ही मृत्युकाल जानना॥१९॥
बलहीने तु तं हन्यात्सप्तभिः पंचभिर्भजेत् ।
आयुस्तयोः स्यात्स्थानस्य प्रदिशेदशुभे सति ॥२०॥
यदि निर्बल हो तो योग को सात से गुणकर ५ से भाग देने से जो वर्षादि
वही माता पिता के आयुष्य का प्रमाण होता है॥२०॥
मुनिभक्तं वसुघ्नं स्यान्नैवं चेन्नैतयोर्मृतिः ।
वक्ष्यमाणेन विधिना वदेदाह पराशरः ॥२१॥
यदि रेखाप्रद ग्रह वली हो तो पूर्व पिंड को आठ से गुणकर ७ से भाग देने
ने लब्ध वर्षादिक दोनों का आयुष्य होता है। शून्य के आयुष्य से रेखा का आयुष्य
अधिक हो तो मृत्यु नहीं होती है ऐसा पाराशर का मत है॥२१॥
चतुर्थभावात्सूर्याच्चआयुसाधनम् -
सूर्यादायुः करौ भूपा मनवोऽर्का नवार्णवाः ।
वेदाक्षीणि तु लग्नस्य वक्ष्याम्यायस्तथैवतत् ॥२२॥
सूर्यादि ग्रहों के और लग्न का क्रम से आयुध्रुवांक २।१६।१४।१२।९।४।४।२
है॥२२॥
स्वोच्चे नीचे तु पातः स्याद्धरणादिविधिस्ततः।
आयुस्तयोः स्यात्तौ तस्मिन् भवने तु तथा स्थितौ।।२३।।
यदि उच्च में ग्रह हो तो ध्रुवांक की आयु ही स्पष्ट होती है और नीच में
ग्रह हो तो अनुपात द्वारा आयु लाना चाहिये॥२३॥
ध्रुवांक द्वारा आयुर्विचारः-
न कश्चित्स्थानदः स्याच्चेत्तत्काले च मृतिर्भवेत् ।
शुभमोगे शुभा प्रोक्ता तयोःस्याद्रश्मिसंभवः ॥२४॥
यदि वहां कोई रेखाप्रद ग्रह न हो तो उसी समय मृत्यु कहना चाहिये शुभग्रह