बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ द्वितीयोऽध्यायः । ६२५
अंगाधिकेऽर्कात्संशोध्य भागीकृत्य त्रिभिर्भजेत् ।
सूर्यचन्द्रौ सत्रिराशी कृत्वा प्रोक्तविधिस्तथा ।।३०।।
एवं चेष्टाबलं प्रोक्तं नैसर्गिकमथो शृणु।
और चेष्टाकेन्द्र ६ राशि से अधिक हो तो १२ राशि में घटाकर अंशादि बनाकर
३ से भाग देने से चेष्टा वल होता है। रवि चन्द्र के चेष्टा केन्द्र ६ राशि से अधिक
होते हुये भी ३ राशि और अयनांश जोड़कर १२ राशि में घटाकर शेष विधि यथावत्
करने से चेष्टा बल होता है।।३०।।
उदाहरण- संवत् २०१३ श्रावण कृष्ण १३ शनौ अहर्गणः २७५० चक्रम्
३९ इस पर से इष्टकालिक मध्यम ग्रह निम्नलिखित हैं।
इष्टकालिक मध्यमग्रह इष्टकालिक स्पष्टग्रह
| सू. | चं. | मं. | बु.के. | बृ.शु. | के. | श. |
|---|---|---|---|---|---|---|
| ३ | २ | १० | १ | ४ | ६ | ७ |
| १९ | २४ | ३ | १० | १५ | २८ | ५ |
| ३९ | १४ | ४३ | ८ | ११ | ४६ | १ |
| १५ | ५७ | ३४ | ११ | ३२ | २ | ४२ |
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. |
|---|---|---|---|---|---|---|
| ३ | २ | १० | ४ | ४ | २ | ७ |
| १८ | २२ | १२ | ५ | १२ | २ | २ |
| २६ | ३० | ३२ | २२ | ५ | ३ | ४० |
| ३४ | ४७ | ८ | ५९ | ५४ | ५ | ५२ |
भौम आदि के शीघ्रोच्च
| मं. | बु. | बृ. | शु. | श. |
|---|---|---|---|---|
| ३ | ४ | ३ | ६ | ३ |
| १९ | २९ | १९ | १७ | १९ |
| ३९ | ४७ | ३९ | २० | ३९ |
| ४५ | १२ | ४५ | २ | ४५ |
अयनांश = २१।५१।१८
स्पष्ट भौम = १०।१२।३२।८
मध्य भौम = १०।२।४२।३४ दोनों अंतर करने से
राश्यादि = ०।९।४१।३४ इसका आधा
= ०।४।५४।४७
मध्यमग्रह में अन्तरार्ध को घटाने से १०।२।४२।३४
०।४।५४।४७
शेष = ९।२७।७।४७ इसे
३।१९।३९।४५
शीघ्रोच्च में घटाने से ५।२१।५१।५८ चेष्टाकेन्द्र हुआ
इसका अंश बनाकर ३ से भाग देने से ३)१७१।१७।५८(५७।१७।१९