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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 627, कुल 800 में से

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पृष्ठ 627

अथ द्वितीयोऽध्यायः । ६२५
अंगाधिकेऽर्कात्संशोध्य भागीकृत्य त्रिभिर्भजेत् ।
सूर्यचन्द्रौ सत्रिराशी कृत्वा प्रोक्तविधिस्तथा ।।३०।।
एवं चेष्टाबलं प्रोक्तं नैसर्गिकमथो शृणु।
और चेष्टाकेन्द्र ६ राशि से अधिक हो तो १२ राशि में घटाकर अंशादि बनाकर
३ से भाग देने से चेष्टा वल होता है। रवि चन्द्र के चेष्टा केन्द्र ६ राशि से अधिक
होते हुये भी ३ राशि और अयनांश जोड़कर १२ राशि में घटाकर शेष विधि यथावत्
करने से चेष्टा बल होता है।।३०।।
उदाहरण- संवत् २०१३ श्रावण कृष्ण १३ शनौ अहर्गणः २७५० चक्रम्
३९ इस पर से इष्टकालिक मध्यम ग्रह निम्नलिखित हैं।
इष्टकालिक मध्यमग्रह इष्टकालिक स्पष्टग्रह

सू.चं.मं.बु.के.बृ.शु.के.श.
३२१०१४६७
१९२४३१०१५२८५
३९१४४३८११४६१
१५५७३४११३२२४२
सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.
३२१०४४२७
१८२२१२५१२२२
२६३०३२२२५३४०
३४४७८५९५४५५२

भौम आदि के शीघ्रोच्च

मं.बु.बृ.शु.श.
३४३६३
१९२९१९१७१९
३९४७३९२०३९
४५१२४५२४५

अयनांश = २१।५१।१८
स्पष्ट भौम = १०।१२।३२।८
मध्य भौम = १०।२।४२।३४ दोनों अंतर करने से
राश्यादि = ०।९।४१।३४ इसका आधा
= ०।४।५४।४७
मध्यमग्रह में अन्तरार्ध को घटाने से १०।२।४२।३४
०।४।५४।४७
शेष = ९।२७।७।४७ इसे
३।१९।३९।४५
शीघ्रोच्च में घटाने से ५।२१।५१।५८ चेष्टाकेन्द्र हुआ
इसका अंश बनाकर ३ से भाग देने से ३)१७१।१७।५८(५७।१७।१९