बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२२ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
वर्षेश-मासेश साधन।
अहर्गण—३७३ / २५२० = ल + शे शेष / ३६० ल.। शेष / ३० =
ल×३+१ / ७ = शेष = वर्षेश
ल×२+१ / १२ = शेष = मासेश
इसके अनुसार
१८४७२२५
३७३
२५२०) १८४६८५२ (७३२ ३६०) २२१२ (६ ३०) २२१२ (७३० ल.
१७६४० २१६० २१०
८२८५ ५२ ११२
७५६० ९०
७२५२ २२
५०४० ६×३+१ / ७ = ५ वर्षेश = गुरु
२२१२ शेष
७३×२+१ / १२ = ३ मासेश = भौम
इस प्रकार से वर्षेश गुरु और मासेश भौम हुये। जिस दिन जन्म होता है
वही वारेश होता है।
कालहोरेश साधन
उक्त दिन बार प्रवृत्ति सूर्योदय के बाद २ घटी १२ पल पर हुई है अतः
बार प्रवृत्ति से इष्ट घटी ३०।१६ हुआ।
(३०।१६ × २) / ५ = ल. = १२, शे. = ०।३२
(६०।३२ - ०।३२ + १) / ७ = ५७ दिनपति से ५ वाँ भौम काल होरेश हुआ।
वर्षेशादिबलचक्र।
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रह |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ० | ० | १ | ० | ० | ० | ० | अंश |
| ० | ० | ३० | ० | १५ | ० | ४५ | कला |
| ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | विकला |
| नतोन्नतबल + पक्षबल + त्रिभागबल + वर्षेशादिबल = कालबल। |