बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 614, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें६१२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
अथ द्वितीयोऽध्यायः
भावसाधनम् -
लग्नं सुखात् सुखं कामात् कामं खात् खं च लग्नतः ।
त्र्यंशमेकद्विगुणितं युज्याल्लग्नादिषु क्रमात् ॥१॥
लग्न को सुख भाव से घटाना, सुख भाव को सातवें भाव से, सातवें भाव
को दशम भाव से और दशम भाव को लग्न से घटाकर शेष का तृतीयांश लेकर
क्रम से १ और २ से गुणकर पूर्व के भावों में जोड़ने से आगे के दो भाव हो जाते
हैं। अर्थात् लग्न को सुखभाव से घटाकर शेष का तृतीयांश एक से गुणकर लग्न
में जोड़ने से द्वितीय भाव और तृतीयांश को २ से गुणकर लग्न में जोड़ने से तृतीय
भाव होता है॥१॥
पूर्वापरयुतेरर्ध संधिः स्याद्द्वयोर्द्वयोः ।
एवं द्वादशभावास्तु भवन्ति च ससंधयः ॥२॥
पूर्वभाव और आगे के भाव का योग कर आधा करने से भाव का संधि होती
है। इस प्रकार संधि के सहित १२ भाव होते हैं॥२॥
उदाहरण-जैसे संवत् २०१३ श्रावण कृष्ण १३ शनिवासरे पुनर्वसुभे
प्रथमचरणे इष्टम ३२।२८।३० जन्मलग्नम् ९।१७।५०।१४।
स्पष्टग्रह । जन्माङ्कम् ।
| सू. | चं | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. |
| ३ | २ | १० | ४ | ४ | २ | ७ |
| १८ | २२ | १२ | ५ | १२ | २ | ३ |
| २६ | ३० | ३२ | २२ | ५ | ३ | ४० |
| ३४ | ४७ | ८ | ५९ | ५० | ५ | ५२ |
[जन्माङ्क चक्र (कुण्डली): प्रथम भाव (लग्न): १०; द्वितीय भाव: ११ मं; तृतीय भाव: १२; चतुर्थ भाव: १; पञ्चम भाव: के २; षष्ठ भाव: शु ३ चं; सप्तम भाव: सू. ४; अष्टम भाव: बु ५ बृ; नवम भाव: ६; दशम भाव: ७; एकादश भाव: रा ८ श; द्वादश भाव: ९]
भावस्पष्ट का उदाहरण- सुख भाव राश्यादि १।१।२९।४ इसमें लग्न
राश्यादि ९।१७।५०।१४ को घटाया तो शेष ३।१३।३८।५० शेष रहा इसमें
तीन से भाग देने से लब्धि राश्यादि १।४।३२।५६ हुई इसे लग्न में जोड़ने से
राश्यादि १०।२२।२३।१० धनभाव हुआ। पुनः लब्धि को २ से गुणा देने से
राश्यादि २।९।५।५३।२० हुआ इसे लग्न में जोड़ने से राश्यादि ११।२६।५६।७
यह सहजभाव हुआ। लग्न और धनभाव को जोड़कर आधा करने से ४।५।६।४२
यह दोनों भावों के बीच की संधि हुई। इसी प्रकार अन्य भावों का भी साधन करना
चाहिये। लग्न से ६ भावों में ६ राशि जोड़ने से शेष ६ भाव और उनकी संधियां
हो जाती हैं शेष चक्र में स्पष्ट है।