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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 611

अष्टकवर्गाध्यायः । ६०९
भृगुभावस्थानप्रदान्ग्रहानाह
रे. सं. ५२ भृगोरष्टकवर्गः

शु.शं.सू.चं.मं.बु.बृ.ल.
१३८१३३५१
२४११२५५८२
३५१२३६६९३
४८४९९१०४
५९५११११११५
८१०८१२८
९११९९
१०११११
१११२

अथ शनेः भावस्थानप्रदान्ग्रहानाह-
शनेः रवितनू सूर्यो लग्नेन्दुकुजसूर्यजाः ।
लग्नाकौ जीवमन्दाराः सर्वे सूर्य बिना क्षते ॥६६॥
शनि से १ भाव में सूर्य, लग्न ये दोनों रेखाप्रद हैं। २ भाव में सूर्य। ३ भाव
में लग्न, चंद्र, भौम, शनि रेखाप्रद हैं। ४ भाव में लग्न, सूर्य रेखाप्रद हैं। ५ भाव
में गुरु, शनि, भौम रेखाप्रद हैं। ६ भाव में चन्द्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि,
लग्न रेखाप्रद हैं।।६६।।
अंर्कोऽर्कजौ बुधोऽर्कारितनुज्ञाः सकलाश्चताः ।
कुजज्ञगुरुशुक्राश्च क्रमात्स्थानमिदं विदुः ॥६७॥
७ भाव में सूर्य। ८ भाव में सूर्य, बुध रेखाप्रद हैं। ९ भाव में बुध। १० भाव
में सूर्य, भौम, लग्न, बुध रेखाप्रद हैं। ११ भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र,
शनि, लग्न ये रेखाप्रद है। १२ भाव में भौम, बुध, गुरु, शुक्र रेखाप्रद हैं।।६७।।
शनेः भावस्थानप्रदान्ग्रहानाह
रे सं. ३९ शनेरष्टकवर्गः

श.सू.चं.मं.बु.बृ.शु.ल.
३१३३६५६१
५२६५८६११३
६४११६९१११२४
११७१०१०१२६
८१११११०
१०१२१२११
११