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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 600, कुल 800 में से

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पृष्ठ 600

६०० · बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
अथ गुरोः करण संख्यां करणप्रदग्रहांश्चाह-
रूपं धनाययोः खे द्वौ व्यये सप्तक्षतेऽर्णवाः ॥३४॥
गुरु से २ रे भाव में १ करण, १० भाव में २ करण, ११ भाव में १ करण,
१० भाव में २ करण, १२ भाव में ७ करण, ६ भाव में ४ करण ।। ३४ ।।
मृतिविक्रमयोः पंच गुरोः शेषेषु वह्नयः ।
शुक्रेन्दुमंदा लग्ने स्वे आये मंदश्च विक्रमे ।। ३५ ।।
८, ३ भाव में ५ करण और शेष भावों (१, ४, ५, ७, ९) में ३ करण
होते हैं। गुरु से १ भाव में शुक्र, चंद्र, शनि ये तीनग्रह करणप्रद हैं, २ और ११
भाव में केवल शनि करणप्रद है ।। ३५ ।।
लग्णारेन्दुज्ञभृगवः सुतेऽकार्यकुजा गृहे ।
शुक्रमंदेदवो द्यूने बुधशुक्रशनैश्चराः ।। ३६ ।।
३ भाव में लग्न, भौम, चंद्र, बुध, शुक्र ये पांच ग्रह करणप्रद हैं। ५ भाव
में सूर्य, गुरु, भौम ये तीन करणप्रद हैं, ४ भाव में शुक्र, शनि, चंद्र ये तीन ग्रह
करणप्रद हैं, ७ भाव में बुध, शुक्र, शनि ये तीन ग्रह करणप्रद हैं ।। ३६ ।।
जीवाराकैन्दवः शत्रौ मंदं विना व्यये सर्वे ।
कर्मणीन्दुशनी धर्मे मंदारगुरवो मृतौ ।। ३७ ।।
६ भाव में गुरु, भौम, सूर्य, चन्द्र ये चार ग्रह करणप्रद हैं, १२ भाव में
शनि को छोड़कर सभी ग्रह करणप्रद हैं, १० भाव में चंद्र, शनि ये २ ग्रह, ९
भाव में शनि, भौम, गुरु ये तीन ग्रह करणप्रद हैं ।। ३७ ।।
स्पष्टार्थगुरुकऱणचक्रम् ।

मासू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ल.स
त.०००३
ध.०१
स.०००००५
सु.०००३
सु.०००३
रि.००००४
जा०००३
मृ.०००००५
ध.०००३
क.००२
आ.०१
व्य०००००००७