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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 597, कुल 800 में से

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पृष्ठ 597

अष्टकवर्गाध्यायः । ५९७
दूसरे भाव में लग्न, बुध, सूर्य, चन्द्रमा, शनि और शुक्र, ये ६ करण देने
वाले हैं। तीसरे भाव में केवल गुरु करण देने वाला है। चौथे भाव में सूर्य, शनि,
चन्द्र, लग्न, भौम ये पांच करण प्रद हैं। पाचवें भाव में लग्न, चन्द्र, गुरु, रवि ये
चार करण प्रद हैं। छठे भाव में शुक्र, बुध, गुरु ये तीन ग्रह करण प्रद हैं। सातवें
भाव में भौम लग्न, शनि ये तीन करण प्रद हैं। आठवें भाव में भौम, लग्न, शनि,
शुक्र, चन्द्रमा ये ५ करण प्रद हैं।।२५।।
होराकरार्किविज्जीवाः शनिः खं सकलाःक्रमात्।
नवम भाव में लग्न, सूर्य, भौम, शनि, बुध, गुरु ये ६ ग्रह करण प्रद हैं।
दशम भाव में केवल शनि करण प्रद है, एकादश भाव में शून्य और बारहवें भाव
में सभी करणप्रद होते हैं।
स्पष्टार्थचन्द्रकरणचक्रम्।

मा.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ल.सू.स.
त.०००००५
ध.००००००६
स.०१
सु.०००००५
सु.०००.०४
रि.०००३
जा०००३
मृ.०००००५
ध.००००००६
क.०१
आ
व्य००००००००८
अथ भौमस्यकरणसंख्यांकरणप्रदग्रहांश्चाह-
व्ययवेश्मसुतस्त्रोषु षट्सप्त धनधर्मयोः ।।२६।।
होराभृत्योः शरा वेदा विक्रमे खेत्रयः क्षते ।
द्वौभवे शून्यमेवं स्यात्करणं भूमिजस्य तु ।।२७।।
'भौम से १२, ४, ५, ७ भाव में ६ करण, २, ९ भाव में ७ करण।।२६।।
१, ८ भाव में ५ करण, ३ भाव में ४ करण, २ भाव में ३ करण, ६ भाव में
२ करण, ११ भाव में शून्य करण होते हैं।।२७।।