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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 568, कुल 800 में से

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पृष्ठ 568

५६८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् !
छत्रचामरसंयुक्तं वैभवं पुत्रसम्पदः ।
नेत्रकुक्षिगता पीडा गुरोः सूक्ष्मगते विधौ ।।४४।। (वृ.चं.)
गुरु के प्रत्यंतर में चन्द्रमा के सूक्ष्मान्तर में छत्र, चामर से युक्त, वैभव का
लाभ, पुत्र सुख, नेत्र और कोख (कुक्षि) में पीड़ा होती है।।४४।।
स्त्रीजनाच्चविषोत्पत्तिर्वधनं चातिनिग्रहम् ।
देशांतरगमो भ्रांतिर्गुरोः सूक्ष्मगते कुजे ।।४५।। (वृ.मं.)
गुरु के प्रत्यंतर में भौम के सूक्ष्मान्तर में स्त्रियों के द्वारा कलह, बंधन और
अत्यंत विग्रह, देशांतर की यात्रा और भ्रान्ति होती है।।४५।।
व्याधिभिः परिभूतः स्याच्चौरोपहतं धनम् ।
सर्पवृश्चिकदंष्ट्रत्वं गुरोः सूक्ष्मगतेऽप्यहौ ।।४६।। (वृ.रा.)
गुरु के प्रत्यन्तर में राहु के सूक्ष्मान्तर में व्याधियों से दुःखी, चोरों द्वारा धन
का अपहरण और सर्प-बिच्छू के काटने का भय होता है।।४६।।
इति गुरु सूक्ष्मांतर फलम् ।
अथ शनि प्रत्यंतरे शन्यादीनां सूक्ष्मान्तर फलम् -
धनहानिर्महाव्याधिः वायुपीडा कुलक्षयः ।
भिक्षाहारी महादुःखी मंदसूक्ष्मदशाफलम् ।।४७।। (श.श.)
शनि प्रत्यंतर में शनिसूक्ष्मान्तर में धन की हानि, महाव्याधि, वायु
की पीड़ा, कुल का नाश और भिक्षा का भोजन तथा बड़ा दुःखी होता
है।।४७।।
वाणिज्यवृत्तेर्लाभश्च विद्याविभवमेव च ।
स्त्रीलाभश्च महीप्राप्तिः शनेः सूक्ष्मगतेबुधे ।।४८।। (श.बु.)
शनि के प्रत्यंतर में बुध के सूक्ष्मान्तर में व्यापार में लाभ, विद्या और वैभव,
स्त्री का लाभ और पृथ्वी का लाभ होता है।।४८।।
चौरोपद्रवकुष्ठादि वृत्तिक्षयविगुंफनम् ।
सर्वाङ्गपीडनं व्याधिः शनिसूक्ष्मगते ध्वजे ।।४९।। (श.के.)
शनि के प्रत्यंतर में केतु के सूक्ष्मान्तर में चोरी का भय, कुष्ठरोग, वृत्ति की
हानि, कुंठता, सर्वांग में पीड़ा और व्याधि होती है।।४९।।