बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६२ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
सूर्य के प्रत्यंतर में भौम के सूक्ष्मान्तर में क्रूरकर्म में आसक्ति, शत्रुओं से पीड़ा
और रक्तस्राव के रोग होते हैं ।।४।।
चौराग्विविषभीतिश्च रणे भंगः पराजयः ।
दानधर्मादिहीनश्च रवेः सूक्ष्मगते ह्यगौ ।।५।। (सू.रा.)
सूर्य के प्रत्यंतर में राहु के सूक्ष्मांतर में चोर, अग्नि, विष से भय, संग्राम
में विफलता वा पराजय और दान-धर्म से हीन होता है।।५।।
नृपसत्कारराजार्हः सेवकैः परिपूजितः ।
राजचक्षुर्गतः शान्तः सूर्यसूक्ष्मगतेगुरौ ।।६।। (सू.वृ.)
सूर्य के प्रत्यंतर में गुरु के सूक्ष्मांतर में राजा के समान सत्कार, नौकरो से
पूजित और राजा का कृपापात्र और शांत होता है।।६।।
धैर्यसाहसकर्मार्थ देवब्राह्मणपीड़नम् ।
स्थानच्युतिं मनोदुःखं रवेः सूक्ष्मगतेशनौ ।।७।। (सू.शं.)
सूर्य के प्रत्यंतर में शनि के सूक्ष्मांतर में धैर्य और साहस के कार्य के लिये
देवता और ब्राह्मण का पीड़न, स्थान की हानि और मन में दुःख होता है।।७।।
दिव्याम्बरादिलब्धिश्च दिव्यस्त्रीपरिभोगता ।
अचिंतितार्थसिद्धिश्च रवेः सूक्ष्ममते बुधे ।।८।। (सू.बु.)
सूर्य के प्रत्यंतर में बुध के सूक्ष्मांतर में दिव्य वस्त्र आदि की प्राप्ति, दिव्य
स्त्री का योग और अचिंतित कार्य की सिद्धि होती है।।८।।
गुरुतार्त्तिविनाशश्च भृत्यदारभवस्तथा ।
क्वचित्सेवकसम्बन्धो रवेः सूक्ष्मतेध्वजे ।।९।। (सू.के.)
सूर्य के प्रत्यंतर में केतु के सूक्ष्मांतर में गौरव नौकर और स्त्री जनित दुःख
का नाश और कभी किसी सेवक से संबंध भी होता है।।९।।
पुत्रमित्रकलत्रादिसौख्यसम्पन्न एव च ।
नानाविद्या च सम्पत्ती रवेः सूक्ष्मगते भृगौ ।।१०।। (सू.शु.)
सूर्य के प्रत्यंतर में शुक्र के सूक्ष्मांतर में पुत्र, मित्र, स्त्री आदि का सुख सम्पन्न
होता है और अनेक प्रकार की सम्पत्ति का लाभ होता है।।१०।।
इति रवौ सूक्ष्मांतरफलम्।