सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 542, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 542

५४४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।
नष्ट हुये राज्य से धन का लाभ, इष्ट की सिद्धि वस्त्रादि का लाभ मित्र और
स्वामी का सन्मान धनधान्य का लाभ ।।४५।।
राजसन्मानकीर्त्तिं च अश्वंदोलादिलाभकृत् ।
विद्वत्प्रभुसमाकीर्णं शास्त्रापारपरिश्रमम् ।।४६।।
राजा से सम्मान और कीर्त्ति, घोड़ा, पालकी का लाभ, विद्वान् और स्वामी
का समागम, शास्त्र में परिश्रम ।।४६।।
पुत्रोत्सवादिसन्तोषमिष्ट बन्धुसमागमू ।
पितृमातृ सुखप्राप्तिं भ्रातृपुत्रादि सौख्यकृत् ।।४७।।
पुत्रोत्सव इष्टबन्धु का समागम पिता-माता के सुख की प्राप्ति और भाई तथा
पुत्र का सुख होता है।।४७।।
दायेशात्षष्ठराशिस्थे व्यये वा पापसंयुते ।
राजचौरादि पीडा च देहपीडा भविष्यति ।।४८।।
दशेश से ६ वा १२ वें भाव में पापग्रह से युत हो तो राजा तथा चोर से
शरीर में पीड़ा होती है।।४८।।
आत्म