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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 800 में से

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षोडशवर्गाध्यायः ४७
अथ षोडशवर्गप्रकरणम्
वर्गान् षोडश संख्याकान् ब्रह्मा प्रोक्तं पितामहः।
तानहं सम्प्रवक्ष्यामि मैत्रेय श्रूयतामिति ।।१।।
हे मैत्रेय ! लोकपितामह ब्रह्माजी ने जो सोलह वर्गों को कहा है, उसे
मैं कहता हूँ।।१।।
क्षेत्रं होरां च द्रेष्काणश्चतुर्थांशः सप्तमांशकः।
नवांशो दशमांशश्च सूर्यांशः षोडशांशकः।।२।।
१ गृह, २ होरा, ३ द्रेष्काण, ४ चतुर्थांश, ५ सप्तमांश, ६ नवांश, ७
दशमांश, ८ द्वादशांश, ९ षोडशांश ।।२।।
त्रिंशांशो वेदवाह्वंशो भांशास्त्रिंशांशकस्तथा।
खवेदांशोऽक्षवेदांशः षष्ठ्यंशश्च ततः परम्।।३।।
१० त्रिंशांश, ११ चतुर्विंशांश, १२ सप्तविंशांश, १३ त्रिंशदंशांश, १४
चत्वारिंशांश, १५ पञ्चचत्वारिंशांश, १६ षष्ठ्यंश ये १६ वर्ग हैं।।३।।
गृहहोराकथनम्–
तत्क्षेत्रं यस्य खेटस्य राशेर्यो यस्य नायकः।
सूर्येन्दोर्विषमे राशौ समे तद्विपरीतकम्।।४।।
जो ग्रह जिस राशि का स्वामी है वही उसका गृह है। विषम राशि
में पहली होरा सूर्य की और दूसरी चन्द्रमा की होती है। सम राशि में
पहली होरा चन्द्रमा की और दूसरी सूर्य की होती है।।४।।
पितरश्चन्द्रहोरेशा देव्यः सूर्यस्य कीर्त्तिताः।
राशेरर्द्धं भवेद्धोरा ताश्चतुर्विंशतिः स्मृताः।
मेषादि तासां होराणां परिवृत्तिद्वयं भवेत् ।।५।।
चन्द्रमा के होरा के स्वामी पितर और सूर्य के होरा के स्वामी देवियाँ
होती हैं। एक राशि का आधा १५ अंश का एक होरा होता है अर्थात् १२
राशियों में २४ होरा होती है, इसलिये मेषादि राशियों की दो आवृत्ति होती
है।।५।।
उदाहरण—जैसे लग्न ९।१५।२२।५७ है, लग्न सम राशि है और १५
अंश से अधिक है, अतः दूसरी होरा सूर्य की है।