बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३६७
पाँचवें भाव में शनि-सूर्य हों और सातवें भाव में क्षीण चन्द्र हो तथा
लग्न और बारहवें भाव में राहु तथा गुरु हों तो प्रेतशाप से वंश का अभाव
होता है।।९३।।
पुत्रस्थानाधिपे मन्दे नाशस्थे लग्नगे कुजे।
कारके नाशराशिस्थे प्रेतशापात्सुतक्षयः।।९४।।
पंचमेश शनि आठवें भाव में, लग्न में भौम और कारक आठवें भाव
में हो तो प्रेतशाप से वंश का अभाव होता है।।९४।।
लग्ने पापे व्यये भानौ सुते चारार्किसोमजाः।
पुत्रेशे रन्ध्रभावस्थे प्रेतशापात्सुतक्षयः।।९५।।
लग्न में पापग्रह हों तथा बारहवें भाव में सूर्य हो और पाँचवें भाव में
भौम, शनि, बुध हों और पंचमेश आठवें भाव में हो तो प्रेतशाप से संतान
का अभाव होता है।।९५।।
लग्ने राहुसमायोगे पुत्रस्थे भानुनन्दने।
कारके नाशराशिस्थे प्रेतशापात्सुतक्षयः।।९६।।
लग्न में राहु, पाँचवें भाव में शनि और कारक आठवें भाव में हों तो
प्रेतशाप से वंश का अभाव होता है।।९६।।
लग्ने राहौ च शुक्रेज्ये चन्द्रे मन्दयुते तथा।
लग्नेशे मृत्युराशिस्थे प्रेतशापात्सुतक्षयः।।९७।।
लग्न में राहु, शुक्र, गुरु हों, चन्द्रमा शनि से युत हो, लग्नेश आठवें
भाव में हो तो प्रेतशाप से पुत्र का अभाव होता है।।९७।।
लग्ने राहुसमायोगे पुत्रस्थे भानुनन्दने।
कुजदृष्टे युते वापि प्रेतशापात्सुतक्षयः।।९८।।
लग्न में राहु तथा पाँचवें भाव में शनि हो, भौम से युत वा दृष्ट हो तो
प्रेतशाप से पुत्र का अभाव होता है।।९८।।
कारके नीचराशिस्थे पुत्रस्थानाधिपे तथा।
नीचदृष्टे नीचयुते प्रेतशापात्सुतक्षयः।।९९।।
कारक नीचराशि में हो और पंचमेश भी अपने नीच में हो तथा
नीचराशिस्थ ग्रह से युत वा दृष्ट हो तो प्रेतशाप से वंश का अभाव होता
है।।९९।।
लग्ने मन्दे सुते राहौ रन्ध्रे भानुसमन्विते।
व्यये भौमसमायोगे प्रेतशापात्सुतक्षयः।।१००।।