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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 359, कुल 800 में से

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पृष्ठ 359

अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३६१
कर्मेशे भ्रातृभादत्थे पापयुक्ते तथा शुभे ।
पुत्रे च कुजसंयुक्ते भ्रातृशापात्सुतक्षयः ।।५५।।
कर्मेश पापग्रह से युत होकर भ्रातृस्थान में हो और पाँचवें भाव में भौम
युत हो तो भाई के शाप से संतान की हानि होती है।।५५।।
पुत्रस्थाने बुधक्षेत्रे शनिराहुसमन्विते ।
रिःफे विदारौ वर्त्तेते भ्रातृशापात्सुतक्षयः ।।५६।।
पंचम भाव में बुध की राशि (३।६) हो और उसमें शनि-राहु युक्त हों
तथा बारहवें भाव में बुध-भौम हों तो भाई के शाप से संतान की हानि
होती है।।५६।।
लग्नेशे भ्रातृराशिस्थे भ्रातृस्थानाधिपे सुते ।
लग्नभ्रातृसुते पापे भ्रातृशापात्सुतक्षयः ।।५७।।
लग्नेश भ्रातृभाव में, भ्रातृभावेश पाँचवें भाव में हो तथा लग्न
भ्रातृ पाँचवें भाव में पापग्रह हो तो भाई के शाप से संतान की हानि होती
है।।५७।।
भ्रात्रीशे नाशराशिस्थे पुत्रस्थे कारके तथा ।
राहुमान्दियुते दृष्टे भ्रातृशापात्सुतक्षयः ।।५८।।
तृतीय भाव का स्वामी ८वें भाव में और पाँचवें भाव में कारक राहु-
मांदि (गुलिक) से युत वा दृष्ट हो तो भाई के शाप से संतान को कष्ट
होता है।।५८।।
नाशस्थानाधिपे पुत्रे भ्रातृनाथेन संयुते ।
रन्ध्रे आरार्किसंयुक्ते भ्रातृशापात्सुतक्षयः ।।५९।।
अष्टमेश पाँचवें भाव में तृतीयेश से युक्त हो, आठवें भाव में भौम-शनि
हों तो भाई के शाप से संतान की हानि होती है।।५९।।
अस्य शान्तिमाह—
भ्रातृशापविमोक्षार्थं श्रवणं विष्णुकीर्त्तनम् ।
चान्द्रायणं चरेत्पश्चात्कावेर्य्यां विष्णुसन्निधौ ।।६०।।
भाई के शाप की शान्त्यर्थ विष्णु का कीर्त्तन सुनना चाहिए। चान्द्रायण
व्रत करे। बाद में कावेरी नदी के किनारे विष्णु के सन्निकट ।।६०।।
अस्वत्थस्थापनं कार्यं दशधेनूः प्रदापयेत् ।
प्राजापत्यं चरेत्तत्र भूमिं दद्यात्फलान्विताम् ।
एवं यः कुरुते भक्त्या पुत्रवृद्धिः प्रजायते ।।६१।।