बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथाष्टकवर्गफलाध्यायः ३५१
शराश्विभिस्तथा विद्वन्प्रज्ञा मन्दोऽभिजायते ।
ऋतुपक्षैर्बुद्धिहीनः पूज्या वागीश्वरी तथा।
धनक्षयः स्यान्नक्षत्रैः श्रीसूक्तं तत्र संजपेत् ।।८१।।
जिस राशि में २५ या २६ रेखा हों उस राशि के सूर्य में बुद्धि मंद होती
है। इसके शान्त्यर्थ वागीश्वरी देवी की उपासना करनी चाहिए। जिस राशि
में २७ रेखा हों उस राशि के सूर्य में धन की हानि होती है। उसकी शान्ति
के लिए श्रीसूक्त का जप करना चाहिए।।८१।।
वसुपक्षयुते मासे न लाभो हानि खेचरैः।
सूर्यहोमश्च विधिना कर्त्तव्यः शुभकांक्षिभिः ।।८२।।
जिस राशि में २८ रेखा हों उस राशि के सूर्य में किसी प्रकार का लाभ
नहीं होता है। इसके शान्त्यर्थ विधिवत् सूर्य का हवन कराना
चाहिए।।८२।।
एकोनत्रिंशता चापि चिन्ता व्याकुलितो भवेत् ।
घृतवस्त्रसुवर्णानि तत्र दद्याद्विचक्षणः।।८३।।
जिस राशि में २९ रेखा हों उस राशि के सूर्य में मनुष्य चिन्ता से
व्याकुल होता है। उसके शान्त्यर्थ घी, वस्त्र-सुवर्ण का दान करना
चाहिए।।८३।।
त्रिंशता धनधान्याप्तिरिति जातकनिर्णयः ।
भूवह्निभिर्महोद्योगः पुत्रसम्पद्गुणाग्निभिः ।।८४।।
जिस राशि में ३० रेखा हों उस राशि के सूर्य में धन-धान्य का लाभ
होता है। जिस राशि में ३१ रेखा हों उस मास में बड़े उद्योग की तथा
पुत्र और सम्पत्ति का लाभ होता है।।८४।।
सहेमवस्त्रलाभश्च चतुस्त्रिंशत्समन्विते ।
पञ्चरामैर्भवेद्धीमान्षट्त्रिंशत्सुतवित्तदा ।।८५।।
जिस राशि में ३४ रेखा होती है उस मास में सुवर्ण, वस्त्र आदि का
लाभ होता है। जिस राशि में ३५ रेखा हों उस मास में बुद्धि में प्रखरता
और जिसमें ३६ रेखा हों उस राशि में पुत्र-धन का लाभ होता है।।८५।।
सप्तत्रिंशद्धनस्याप्तिरष्टत्रिंशत्सुखार्थदा ।
द्रव्यरत्नाप्तिरेकोनचत्वारिंशाच्च विद्यते ।।८६।।