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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 344, कुल 800 में से

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पृष्ठ 344

३४६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
शुभ-अशुभ भावों को देखकर उनकी राशियों के रेखापिंड को रेखा
से गुणाकर १२ का भाग देने से शेष तुल्य राशि पर जब शनि जाता
है।।५९।।
यस्यां तत्तद्भावहानिं च विद्यात्
पूर्वे अंशे वाथवा तत्त्रिकोणे।
कृत्वा बिन्दुभ्यस्तु कालं सुधीमां-
स्तस्मात् वाच्यः प्राप्तिकालः शुभत्वे।।६१।।
उस वर्ष में राशि संबंधी भाव की हानि होती है अथवा उस राशि से
त्रिकोण राशि में जब शनि जाता है तब भी उस भाव को हानि होती
है। यदि भाव शुभ है तो रेखा से भिन्न भाव के बिन्दुओं से उस भाव के
शुभ फल की प्राप्ति के समय को कहना चाहिए।।६०।।
अथारिष्टसमयज्ञानमाह-
मृत्युभावेशभात्कोणनिघ्नं फलं मृत्युजं सूर्यशेषर्क्षयुक्ते रवौ।
तत्त्रिकोणेऽथवारिष्टमासं वदेत्तातमातुर्गृहाद्येऽथवा कल्पयेत्।।६२।।
अष्टमेश जिस राशि में है उस राशि के त्रिकोण-शोधन से
उत्पन्न फल को अष्टम भाव स्थित फल से गुणाकर उसमें १२ का
भाग देने से शेषतुल्य राशि पर अथवा उससे त्रिकोण राशि पर सूर्य के आने
से उस मास में अरिष्ट होता है।।६२।।
अवस्थापरत्वेन शुभाशुभविचारः-
मीनाद्यं मिथुनान्तकं प्रथमकं प्रोक्तं वयः प्राक्तनैः
कर्काद्यं वणिजान्तकं तरुणता संज्ञं च मध्यं बुधैः।
कुम्भान्तं स्थविराह्वयं च बहुभिर्यत्तत्फलैः संयुतं
तत्सौख्यार्थविशेषकं बलयुतेनैतद्विशेषाच्छुभम्।।६३।।
मीन राशि से मिथुन पर्यन्त चार राशियों की प्रथम (बाल्यावस्था)
अवस्था होती है। कर्क राशि से तुला पर्यन्त चार राशियों की तरुण
(युवावस्था) अवस्था होती है। वृश्चिक राशि से कुम्भ पर्यन्त चार
राशियों की स्थविर (वृद्धावस्था) अवस्था होती है। जिन-जिन अवस्था के
रेखाओं का योग अधिक हो उन-उन अवस्थाओं में सुख होता है।।६३।।