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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 327, कुल 800 में से

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पृष्ठ 327

अथ पिंडोत्पत्याध्यायः ३२९
शेष अंक को) गुणाकर गणन फल को उस राशि के नीचे रख दे। यदि
एक राशि में दो-तीन ग्रह हों तो उनके गुणकों से अलग-अलग उस संख्या
को गुणाकर सभी का योगकर उस राशि के नीचे रखना चाहिए। गुरु,
भौम, शुक्र और बुध का क्रम से १०, ८, ७, ५, गुणक है।।३।।
बुधस्य संख्या शेषाणां ग्रहगुणैर्गुणयेत्क्रमात्।
सर्वेषां फलयोगोऽपि पिण्डमानं प्रकथ्यते ।।४।।
इस प्रकार गुरु का १०; भौम का ८, शुक्र का ७, बुध का ५ और शेष
ग्रहों का ५ गुणक है। सभी फलों के योग को पिण्ड कहते हैं।।४।।
| राशि | मे. | वृ. | मि. | क. | सिं. | क. | तु. | वृ. | ध. | मं. | कुं. | मी. |
| :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- |
| गुणक | ७ | १० | ८ | ४ | १० | ५ | ७ | ८ | ९ | ५ | ११ | १२ |

ग्रहसू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.
गुणक५५८५१०७५
सूर्याष्टकवर्गशोधनम्
जन्मकालीन ग्रहाःचं. शु.सू.बु. बृ.
:---:---::---::---::---::---::---::---:
राशयः१२३४५६७
रेखा५५४३४२४
त्रिकोण शोधन१३१०००१
एकाधिपत्य शोधन१२००००१
राशिगुणन फल७२०००००७
ग्रहगुणन फल०००००००