बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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होरालग्न पृ. (२४) स्थिर (२) में } मध्यायु
जन्मलग्न चर (१०) में }
पृ. २५५ श्लोक ३३ के अनुसार दो प्रकार से मध्यायु तथा आयुखण्ड-
बोधक चक्र (पृ. २५७) के अनुसार मध्यायु का दूसरा खण्ड (७२) वर्ष
प्राप्त हुआ।
लग्नेश शनि १।४८।५।२ } योगकर्ता ४ हैं अतः चारों
अष्टमेश सूर्य १८।२६।३४ } के अंशादि का योग
होरा लग्न १५।०।० } किया गया है।
जन्म लग्न १५।२३।३७ }
५०।३८।३ ÷ ४ : = १२।३९।३०।४५
अंशादि १२।३९।३०।४५ × ३६ (द्वितीय खण्ड पृ. २५७)
३०) ४५५।४२।२७।० (१५ (वर्ष)
३०
१५५
१५०
५ × १२
६०
४२
१०२ (३ (मास)
९०
१२ × ३०
३६०
२७
३८७ (१२ (दिन)
३०
८७
६०
२७ × ६० | लब्धि वर्षादि = १५।३।१२।५४।०
१६२०
०
१६२० (५४ (घटी)
१५०
१२०
१२०
x
मध्यायु द्वितीय खण्ड वर्षादि ७२।०।०।०।० में
लब्धि वर्षादि = १५।३।१२।५४।० घटाने से
स्पष्टायुर्वर्षादि = ५६।८।१७।६।०