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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 226, कुल 800 में से

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पृष्ठ 226

२२८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
अथ धनयोगाध्यायः
अथातः सम्प्रवक्ष्यामि धनयोगं विशेषतः।
पञ्चमे तु भृगोक्षेत्रे तस्मिन् शुक्रेण वीक्षिते।।१।।
लाभे शनैश्चरयुते बहुद्रव्यस्य नायकः।
अब मैं विशेष धनयोगों को कहता हूँ। पाँचवें भाव में शुक्र की राशि
(२।७)हो और उसे शुक्र देखता हो तथा एकादश में शनि हो तो बहुधन
का स्वामी होता है।।१।।
पञ्चमे सौम्यकक्षेत्रे तस्मिन्सौम्ययुते यदि।।२।।
लाभे तु चन्द्रभौमौऽथ बहुद्रव्यस्य नायकः।
पाँचवें भाव में बुध की राशि (३।६) हो और उसमें बुध युत हो तथा
एकादश भाव में चन्द्रमा-भौम हो तो बहुत द्रव्य का स्वामी होता है।।२।।
पञ्चमे तु शनिक्षेत्रे तस्मिन्सूर्यसुतो यदि।।३।।
लाभे सोमात्मजस्थे वा बहुद्रव्यस्य नायकः।
पाँचवें भाव में शनि की राशि (१०।११) हो और उसमें शनि युत हो
तथा एकादश भाव में बुध हो तो अनेक द्रव्य का स्वामी होता है।।३।।
पञ्चमे तु रविक्षेत्रे तस्मिन् रवियुते यदि।।४।।
लाभे रवीन्दुसंस्थे तु बहुद्रव्यस्य नायकः।
पाँचवें भाव में सूर्य की राशि (५) हो और उसमें सूर्य हो तथा
लाभभाव में रवि-चन्द्रमा हों तो बहुत द्रव्य का स्वामी होता है।।४।।
पञ्चमे तु शनिक्षेत्रे तस्मिन् शनियुते यदि।
लाभे भौमेन संयुक्ते बहुद्रव्यस्य नायकः।।५।।
पाँचवें भाव में शनि की राशि (१०।११) हो और शनि युत हो तथा
लाभभाव में भौम हो तो बहुत द्रव्य का स्वामी होता है।।५।।
पञ्चमे तु गुरुक्षेत्रे तस्मिन् गुरुयुते यदि।
लाभे तु चन्द्रभौमौ चेद्बहुद्रव्यस्य नायकः।।६।।
पाँचवें भाव में गुरु की राशि (९।१२) हो और उसमें गुरु युत हो और
लाभभाव में चंद्रमा-भौम हों तो बहुत द्रव्य का स्वामी होता है।।६।।