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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 800 में से

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पृष्ठ 212

२१४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
अथ चन्द्रयोगानाह-
सहस्ररश्मितश्चन्द्रे कण्टकादिगते सति ।
न्यूनमध्यवरिष्ठानि धनधीनैपुणानि च ।।३८।।
स्वांशे वा स्वाधिमित्रांशे स्थिते चेद्दिवसे शशी ।
गुरुणा दृश्यते तत्र जातो वित्तसुखान्वितः ।।३९।।
स्वाधिमित्रांशगश्चन्द्रो दृष्टो दानवमन्त्रिणा ।
निशासु कुरुते लक्ष्मीं छत्रध्वजसमाकुलम् ।
विपर्यस्थे तु शीतांशौ जायन्तेऽल्पधना नराः ।।४०।।
यदि सूर्य से चंद्रमा केन्द्र में हो तो जातक को धन, बुद्धि और निपुणता
अल्प होती है। चंद्रमा पणफर में हो तो धन की निपुणता मध्यम होती है
और चंद्रमा आपोक्लिम में हो तो धन आदि उत्तम होते हैं। यदि दिन में
जन्म हो और चंद्रमा गुरु से देखा जाता हुआ अपने नवांश में वा अधिमित्र
के अंश में हो तो जातक धनी और सुखी होता है। रात्रि का जन्म
हो और चंद्रमा अपने अधिमित्रांश में होकर शुक्र से देखा जाता हो तो लक्ष्मी,
छत्र, ध्वज से युक्त मनुष्य होता है। इसके विपरीत चंद्रमा हो तो अल्पधनी
होता है ।।३८-४०।।
अथ चन्द्राधियोगस्तत्फलं चाह-
शशिनः सौम्याः षष्ठे द्यूने वा निधनसंस्थिते ।
स्यादधियोगो जाताः सौम्यैः सबलैरधराधीशः ।
मध्यबलैर्मन्त्री स्यादधमबलैः सैन्यनायकः ।।४१।।
चन्द्राद्वृद्धिगतैः सौम्यैः धर्मशीलो महाधनी ।
द्वाभ्यां समोऽल्पवसुमानेकेन परिकीर्त्तितः ।
चन्द्रालग्नाद्ग्रहाभावे दरिद्रो दुःखितो भवेत् ।।४२।।
चंद्रमा से शुभग्रह ६-७-८ भाव में हो तो 'अधियोग' होता है। यदि
शुभग्रह बली हों तो अधियोग में उत्पन्न जातक राजा होता है। मध्यम
बली हों तो मंत्री, अधम बली हों तो सेनानायक होता है। चंद्रमा से
(३-६-११) भाव में शुभग्रह हों तो जातक धर्मशील एवं महाधनी होता
है। दो शुभग्रह हों तो समधनी और एकं शुभग्रह हो तो अल्पधनी
होता है। यदि चंद्रमा से वा लग्न से उक्तस्थानों में ग्रह न हों
तो दरिद्र होता है।।४१-४२।।