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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 183, कुल 800 में से

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भावेशफलाध्यायः १८५
लग्नेश धनस्थान में या लाभस्थान में हो तो जातक लाभ से युक्त पंडित,
सुशील, धर्मात्मा, ज्ञानी और अनेक स्त्रियों से युक्त होता है।।२।।
लग्नेशे सहजे षष्ठे सिंहतुल्यपराक्रमी।
सर्वसम्पद्युतो मानी द्विभार्यो मतिमान्सुखी ।।३।।
लग्नेश तीसरे या छठे भाव में हो तो जातक सिंह के समान पराक्रमी,
सभी सम्पत्ति से युक्त, मानी, दो स्त्रियों वाला और बुद्धिमान् एवं सुखी
होता है।।३।।
लग्नेशे दशमे तुर्ये पितृमातृसुखन्वितः।
बहुभ्रातृयुतः कामी गुणसौन्दर्यसंयुतः ।।४।।
लग्नेश दशम या चतुर्थ भाव में हो तो पिता-माता के सुख से युक्त,
अनेक भाइयों वाला, कामी, गुण-सौंदर्य से युक्त होता है।।४।।
लग्नेशे पञ्चमे दानी सुतसौख्यं च मध्यमम्।
प्रथमापत्यनाशः स्यात्क्रोधी लोभी नृपप्रियः।।५।।
लग्नेश पाँचवें भाव में हो तो जातक दानी, मध्यम संतान सुखवाला,
प्रथम संतान से हीन, क्रोधी, लोभी और राज़प्रिय होता है।।५।।
लग्नेशे सप्तमे यस्य भार्या तस्य न जीवति।
विरक्तो वा प्रवासी वा दरिद्रो वा नृपोऽपि वा ।।६।।
लग्नेश सातवें भाव में हो तो स्त्री का विनाश होता है। वह व्यक्ति
विरक्त हो या परदेशी हो, वा दरिद्र हो या राजा होता है।।६।।
लग्नेशे व्ययगेऽष्टस्थे सिद्धविद्याविशारदः।
द्यूती चौरो महाक्रोधी परनार्यतिभोगकृत् ।।७।।
लग्नेश १२वें या ८वें भाव में हो तो जातक जूआ खेलने वाला, चोर,
क्रोधी और परस्त्रीगामी होता है।।८।।
लग्नेशे नवमे पुंसो भाग्यवान् जनवल्लभः।
विष्णुभक्तः पटुर्वाग्मी पुत्रदारधनैर्युतः ।।८।।
लग्नेश नवम भाव में हो तो पुरुष भाग्यवान्, जनप्रिय, विष्णुभक्त,
पंडित, वक्ता और पुत्र-स्त्री से युक्त होता है।।८।।
अथ धनेशभावफलम्–
धनेशे च तनौ पुत्री स्वकुटुम्बस्य कण्टकः।
धनवान्निष्ठुरः कामी परकार्येषु तत्परः।।९।।