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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 800 में से

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पृष्ठ 156

१५८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
यदि दोनों केन्द्र-त्रिकोण में हों और शुभग्रह से युक्त हों तो सुन्दर गृह
प्राप्त होता है। गृहादि की चिंता सुखेश से, गुरु से सुख की चिंता ।।६१।।
दिव्याङ्गनावाहनवस्तुभूषा चिन्ता तु कार्या भृगुणा बुधैर्द्रैः।
तमःशनिभ्यामभिचिन्त्यमायुरर्केण तातःशशिना च माता ।।६२।।
स्त्री, वाहन, आभूषण की चिन्ता शुक्र से, राहु-शनि से आयु की चिंता,
सूर्य से पिता और चंद्रमा से माता की चिंता करनी चाहिए ।।६२।।
बुधेन बुद्धिः सदनर्क्षसंस्थां गतेन भावेशयुर्तेन वा स्यात्।
केन्द्रत्रिकोणेषु गतेषु तत्र प्रपश्यता वापि स्वतुङ्गगेन ।।६३।।
बुध से बुद्धि की चिंता करना चाहिएं। जब ये कारक उन-उन भावों में
भावेशों से युतं हों तो उन-उन पदार्थों की वृद्धि कहना चाहिए। सुखेश
केन्द्र-त्रिकोण में उच्च में गये हुए ग्रह से दृष्ट हो ।।६३।।
स्वकीये स्वांशगे स्वोच्चे सुखस्थानस्थितो यदि ।
सुखवाहनवृद्धिः स्याच्छङ्खभेर्यादिवाद्ययुक् ।।६४।।
अपने राशि, उच्च और अपनी अंश में होकर सुख-स्थान में हो तो विचित्र
प्रकार से मंडित गृह होता है ।।६४।।
विचित्रसौधप्राकारं मण्डितं गृहमादिशेत् ।
कर्माधिपेन सहिते नाथे केन्द्रे कोणेऽवस्थिते ।।६५।।
यदि सुखेश कर्मेश से युत होकर केन्द्र-त्रिकोण में हो तो सुन्दर गृह होता
है।।६५।।
बन्धुस्थानेश्वरे सौम्ये शुभग्रहनिरीक्षिते ।
शशिजे लग्नसंयुक्ते बन्धुपूज्यो भवेन्नरः ।।६६।।
सुखेश शुभग्रह में हो और शुभग्रह से देखा जाता हो तथा बुध लग्न
में हो तो मनुष्य बंधुपूज्य होता है ।।६६।।
मातुःस्थाने शुभयुते तदीशे स्वोच्चराशिगे ।
कारके बलसंयुक्ते मातृदीर्घायुरादिशेत् ।।६७।।
मातृस्थान में शुभग्रह हो, सुखेश उच्चराशि में हो और मातृकारक बली
हो तो माता दीर्घायु होती है ।।६७।।
सुखेशे केन्द्रभावस्थे तथा केन्द्रे स्थितो भृगुः।
शशिजे स्वोच्चराशिस्थे विद्वान्पण्डित एव सः ।।६८।।