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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 800 में से

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११८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
कारकांश में केतु हो और शुक्र से दृष्ट वा युत हो तो क्रिया-कर्म
से युक्त होता है।।३५।।
कारकांशे स्थिते केतौ शनिसौम्यनिरीक्षिते।
बलवीर्येण रहितो जायते सोऽपि मानवः।।३६।।
कारकांश में केतु हो, शनि-बुध से देखा जाता हो तो मनुष्य बलवीर्य
से हीन होता है।।३६।।
सकेतौ कारकांशे च बुधशुक्रनिरीक्षिते।
जायते पौनःपुनिको दासीपुत्रोऽथवा भवेत् ।।३७।।
कारकांश में केतु हो और बुध-शुक्र से देखा जाता हो तो रुक-रुक कर
बोलने वाला या दासीपुत्र होता है।।३७।।
सकेतौ कारकांशे च अन्यग्रहनिरीक्षिते।
शनिदृष्टिविहीने च सत्याच्च रहितो भवेत् ।।३८।।
कारकांश में केतु हो, शनि को छोड़कर शेष ग्रह देखते हों तो असत्य
बोलने वाला होता है।।३८।।
कारकांशे यदा विप्र भृगुभास्करवीक्षिते।
राजप्रेष्यो भवेद्बालो जायते नात्र संशयः ।।३९।।
यदि कारकांश को शुक्र-सूर्य देखते हों तो जातक राजा का नौकर होता
है।।३९।।
कारकांशाद्धनभावफलम्—
अंशात्कुटुम्बे भृग्वारवर्गे स्यात्पारदारिकः।
तयोर्दृग्योगकाभ्यां च भवेदामरणं किल ।।४०।।
कारकांश से धन भाव में शुक्र-भौम का षड्वर्ग हो तो परस्त्रीगामी
होता है। यदि शुक्र-भौम देखते हों तो आमरण परस्त्रीगामी होता है।।४०।।
केतुना प्रतिबन्धः स्याद्गुरुणा स्त्रैण एव च।
राहुणा चार्थनिवृत्तिः स्याद्धने एवं फलं भवेत् ।।४१।।
केतु देखता हो तो नहीं होता है, गुरु देखता हो तो स्त्री के वश में
होता है, राहु देखता हो तो परस्त्री के लिए द्रव्य खर्च करता है।।४१।।