बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
कारकांशे तु पूर्णेन्दुर्दैत्याचार्येण वीक्षितः।
शतभोगी भवेत्सोऽथ विद्याजीवी च जायते ।।२१।।
यदि कारकांश में पूर्णचन्द्रमा हो और शुक्र से देखा जाता हो तो १००
वर्ष की आयु होती है और विद्या द्वारा जीविका होती है।।२१।।
कारकांशे यदा भौमे बलाढ्येन युतेक्षिते।
रसवादी कुन्तधारी वह्निकृज्जीवनं भवेत् ।।२२।।
यदि कारकांश में भौम हो और किसी बली ग्रह से युत वा दृष्ट हो
तो रस बनाने वाला, कुंत (माला) धारण करने वाला और अग्नि
द्वारा जीविका प्राप्त करने वाला होता है।।२२।।
कारकांशे यदा सौम्यः तिष्ठत्येव बलाढ्यकः।
शिल्पको व्यवहारी च वणिक्कृत्यकसे द्विज ।।२३।।
यदि कारकांश में बुध हो तो और बली हो तो शिल्पी, व्यवहारी
और बनिए का कार्य करने वाला होता है।।२३।।
कारकांशे गुरौ विप्र कर्मनिष्ठापरो भवेत्।
सर्वशास्त्राधिकारी च विख्यातः क्षितिमण्डले ।।२४।।
यदि कारकांश में गुरु हो तो कर्म करने वाला, सभी शास्त्रों का
अधिकारी और पृथ्वी पर प्रसिद्ध होता है।।२४।।
कारकांशे यदा शुक्रो राजमान्यः सदा भवेत्।
सदिन्द्रियः शतायुश्च कथनीयं द्विजोत्तम ।।२५।।
यदि कारकांश में शुक्र हो तो राजा से सम्मान प्राप्त करता है, सुन्दर
और १०० वर्ष की आयु वाला होता है।।२५।।
कारकांशे यदा सौरिर्मृत्युलोके प्रसिद्धियुक्।
महतां कर्मणां वृत्तिः क्षितिपालेन पूजितः।।२६।।
कारकांश में शनि हो तो संसार में प्रसिद्ध, बड़े कार्यों को करने वाला
और राजा से पूजित होता है।।२६।।
कारकांशे यदा राहुर्धनुर्धारी प्रजायते।
जाङ्गल्यलौहयन्त्रादिकारकश्चौरसङ्गमी ।।२७।।
कारकांश में राहु हो तो धनुष धारण करने वाला, जंगली, लोह के
यंत्रों को बनाने वाला, चोर और संयमी होता है।।२७।।