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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 800 में से

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पृष्ठ 112

११४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
कारकांशचक्रम्

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| \       बु. २       /   \       १२      / |
|   \               /  च.  \            /   |
| ३   \           /   १ म.   \        /  ११ |
|       \       /              \    /       |
|---------+----------------------+----------|
|       /       \              /    \       |
| श. ४ वृ.        \          /        १०    |
|       \           \      /        /       |
|   ५     \       ७   \  /        /   सू. ९ |
|           \       /   \       /           |
|             \   /   ६   \   /             |
|               +-----------+               |
|               |   शु. ८   |               |
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(टिप्पणी: १ म. = चन्द्र, २ = बुध, ४ वृ. = शनि, ८ = शुक्र, ९ = सूर्य)

कन्यायां कारकांशे चेत्तिष्ठत्येवं फलं भवेत्।
युग्मवत्कण्डुरोगात्तिर्वह्निदोषेण दुःखभाक् ।। ९ ।।
कन्यांश में आत्मकारक हो तो मिथुनांश के समान ही कंडू (खुजली)
आदि रोग से कष्ट होता है॥९॥
तुलाख्यं कारकांशे च व्यापारेषु रतोऽधिकः।
क्रयविक्रयकर्त्ता च यदि जातो नृपालये ॥१०॥
तुला कारकांश हो तो वह व्यापार में अधिक संलग्न, खरीद-बिक्री
करने में पटु होता है॥१०॥
वृश्चिके कारकांशे च सर्पादिभयकारकः।
मातुः पयोधरे पीडा जायते द्विजसत्तम ॥११॥
वृश्चिकांश में कारक हो तो सर्प आदि से भय और माता के स्तन
में पीड़ा होती है॥११॥
चापस्थे कारकांशे च वाहनाद्भयमादिशेत्।
उच्चात्पतनं वापि कोपी वस्तुसमन्वितः॥१२॥
नक्रकारकांशे विप्र सिद्धिर्जंलचरादयः।
शङ्खमुक्ताप्रवालादिमत्स्यंखेचरदेवताः॥१३॥
धन. कारकांश हो तो वाहन से गिरने का भय वा ऊँचे से गिरने का
भय, कोपी और वस्तुसंग्रही होता है॥१२॥ मकर के अंश में कारक के
होने से मूँगा आदि, मछली एवं पक्षियों से लाभ होता है॥१३॥
कुम्भाख्यकारकांशे च तडागादीनि कारयेत्।
कीर्त्तिमान्धर्मवान्सोऽपि जायते द्विजसत्तम ॥१४॥