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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 102, कुल 800 में से

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पृष्ठ 102

s are:

  • ो over य
  • े over त
    There is NO other mātrā!
    And the consonants are:
    प्र
    ब
    ल + ा = ला
    य + ो = यो
    प
    क
    ल + प = ल्प
    य
    त + े = ते
    It is 100% प्रबलायोपकल्प्यते!

Let's double check line 24:
यत्र जन्मनि सोऽपि स्याच्छुभदृष्टे शुभागर्ला।
Wait, look at शुभागर्ला:
श + ु = शु
भ + ा = भा
ग
र् + ल + ा = र्ला
Yes, शुभागर्ला।

Line 25:
तेन दृष्टेक्षिते लग्ने प्रबलायोपकल्प्यते।।२७।।

Line 26:
यदि जन्मकाल में शुभग्रह से दृष्ट शुभ अर्गला हो और उसी शुभग्रह

Line 27:
से लग्न युत वा दृष्ट हो तो लग्न प्रबल होती है।।२७।।

Line 28:
यदि पश्येद्ग्रहस्तत्र विपरीतार्गलसंस्थितः।

Line 29:
`प्रथमां तु विजानीयाद्विपरीतार्गलां द्व