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सर्वकोश
बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

Brihaspati Sutra or Barhaspatya Rajanitishastra with Commentary

महर्षि बृहस्पति (सम्पादक: डॉ. एफ. डब्ल्यू. थॉमस) द्वारा

DevanagariHindipublished100 पृष्ठ

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पृष्ठ 55

तृतीयाऽध्यायः । २३
बदरिकासालग्रामपुरुषोत्तमद्वारकाबिलवाचलानन्तसिंह्⁶⁰ श्री-
रङ्गाः ॥१२०॥
—
अष्टौ शैवाः ॥१२१॥
⁶¹अविमुक्त[ क ]गङ्गाद्वारशिवक्षेत्ररामेयमुनाशिवसरस्वतीमध्य-
⁶²शार्दूलगजक्षेत्राः ॥१२२॥
शाक्ता अ[१५ क]ष्टौ च ॥१२३॥
⁶³†ओध्रीण† जालपूर्णकामकोष्ठश्रीशैलकाञ्चीमहेन्द्राः ॥१२४॥
⁶⁴एते महाक्षेत्राः ॥१२५॥
सर्वसिद्धिकराश्च ॥१२६॥
⁶⁵वन्ध्याश्च ॥१२७॥
⁶⁶विन्ध्ये निसं वसति दुर्गा भद्रकाली च ॥१२८॥
कुमारे कुमारो वसति निसं ॥१२९॥
सह्ये गणपतिः ॥१३०॥
⁶⁷रैवतके शास्ता ॥१३१।
महेन्द्रे गरुडः ॥१३२॥
पारियात्रे क्षेत्रपालः ॥१३३॥
कर्मभूमौ भारते मनुष्यैर्बहवो देवाः ॥१३४॥
61. W अविमुक्तत्तगङ्गा० । 62. W ०त्रा (masc. as in
119). 63. W दण्डी० । 64. Sic (masc.) 65. Sic (for वन्द्याश् ?)
66. M वसतिर् । 67. W रैवते ।