सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

Brihaspati Sutra or Barhaspatya Rajanitishastra with Commentary

महर्षि बृहस्पति (सम्पादक: डॉ. एफ. डब्ल्यू. थॉमस) द्वारा

DevanagariHindipublished100 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 100 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 50

१८ बार्हस्पत्यसूत्रम् ।
अक्षैर्दी²³व्येत् ॥४६॥
नैव²⁴ दीव्याच्च ॥४७॥
सर्पादीन् हन्यात् ॥४८॥
उत्तमान्नानामन्त्र²५सिद्धान् [१२क] विद्याबहुलान् द्विजान् मान-
येत् ॥४९॥
अन्यराष्ट्रजान् द्विजान् क्षत्रबन्धून् कुमारसामन्तादीनात्मवत्
सम्भावयेद्भो²⁶जनाच्छादनादिभिः ॥५०॥
शरणागतं सर्वपातकयुक्तमपि²⁷ रक्षेत् ॥५१॥
दुष्टनिग्रहं कुर्यात् ॥५२॥
शिष्टपरिपालनञ्च ॥५३॥
ग्रामं न बाधेत ॥५४॥
नगरञ्च ॥५५॥
देवालयानि च ॥५६॥
आसवानि²⁸ सेवयेत् ॥५७॥
अति न ॥५८॥
मांसानि च ॥५९॥
घृणा कार्या ॥६०॥

  1. W डि० । 24. Sic M W. 25. W नमन्त्र० । 26. M
    interpunctuates here and not after ०नादिभिः । 27. W
    सर्वपट्टत० । 28. Sic W M (for ०वान् ?)