बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)
Brihaspati Sutra or Barhaspatya Rajanitishastra with Commentary
महर्षि बृहस्पति (सम्पादक: डॉ. एफ. डब्ल्यू. थॉमस) द्वारा
DevanagariHindipublished100 पृष्ठ
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१६ बार्हस्पत्यसूत्रम् ।
लौकायतिकक्षपणकबौद्धादि बहुशार्दूलदुष्टमृगाकीर्णशून्या-
टवीगुहामार्गवत् ॥१५॥
एतन् निरूप्यैकमाश्रयेत्^६ ॥१६॥
ज्योतिर्नाथस्थितं सदा निरूपयेत् ॥१७॥
चातुर्वर्ण्यं रक्षेच्च ॥१८॥
औषधानि सेवेत च ॥१९॥
बलवर्णतेजोमदबुद्धिशौर्यदयावर्धनानि दोषधातुशमानि^७ ॥२०॥
दानमानालङ्कारविद्याभिः सिद्धिं लभेत ॥२१॥
अष्टादश तीर्थानि निरूपयेत् ॥२२॥
षट् प्रकृतयस्तीर्थं^८ शत्रुमित्रोदासीना[११क]श्च^९ ॥२३॥
अन्तः शत्रुरन्तर्मित्रोऽन्तरुदासीन^१० इति^११ तेऽप्यनुजीविसखि-
सुहृदश्च ॥२४॥
भार्यापुत्रबान्धवाश्च ॥२५॥
अन्येऽपि देवालयनृत्तयागभूम