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सर्वकोश
बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

Brihaspati Sutra or Barhaspatya Rajanitishastra with Commentary

महर्षि बृहस्पति (सम्पादक: डॉ. एफ. डब्ल्यू. थॉमस) द्वारा

DevanagariHindipublished100 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 100 में से

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पृष्ठ 46

१४ बार्हस्पत्यसूत्रम् ।
दुर्जनमध्ये सूर्यवत् प्रकाशते सुजनः ३६ ॥६७॥
अधर्मव्यवस्थितान् ३७ न्यायवृत्तेन वारयेत् ॥६८॥
अधर्मं नार्जयेत् ॥६९॥
अकीर्तिं नार्जयेत् ॥७०॥
न मारयेत् ॥७१॥
लोला निवार्यतां ३८ धर्मपाठाङ्कुशेन गज इव ॥७२॥
गुरुवचनमलङ्घनीयं नयानुगतं चेत् ३९ ॥७३॥
गुरुमपि नीतिवियुक्तं निरासयेत् ॥७४॥
गुरुराहेति ॥७५॥
इति बार्हस्पत्यसूत्रे द्विती[१०क]योऽध्यायः ॥
36. W सुधर्मः । 37. M ०स्थिता । 38. M ०तामधर्० ।
39. W गतश्चे ।