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बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

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DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

इस ग्रन्थ के बारे में

बृहन्नारदीय पुराण, जिसे नारदपुराण भी कहा जाता है, परम्परा में महर्षि व्यास से जोड़ा जाता है। इसका पूर्वभाग सनक आदि कुमारों द्वारा नारद को दिए गए उपदेशों के रूप में है, जिनमें धर्म, भक्ति, व्रत, तीर्थ, मन्त्र-साधना और वेदाङ्गों (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और छन्द) का विस्तृत वर्णन आता है। इसकी एक विशेषता अठारह पुराणों की विषय-सूची है, जिसमें प्रत्येक पुराण की श्लोक-संख्या और विषय बताए गए हैं; स्कैन में 'पञ्चविंशतिसाहस्रं...' और 'प्रभासस्य च माहात्म्यं...' जैसे श्लोक इसी अंश के हैं।

यह संस्करण हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की पुराण-प्रकाशन योजना के अन्तर्गत छपा 'बृहन्नारदीयपुराणम् (पूर्वभागः)' है, जिसमें संस्कृत मूल के साथ व्याकरण-वेदान्ताचार्य तारिणीश झा का हिन्दी अनुवाद है। प्रथम संस्करण शक 1910, अर्थात् 1989 ई. में प्रकाशित हुआ; प्रकाशक सम्मेलन के प्रधान मन्त्री डॉ. प्रभात मिश्र शास्त्री थे।

प्रकाशकीय वक्तव्य इस पुराण के ही एक श्लोक से आरम्भ होता है, जिसमें कहा गया है कि जैसे नदियों में गंगा और सरोवरों में पुष्कर श्रेष्ठ है, वैसे ही पुराणों में नारदीय। पुस्तक 1008 पृष्ठों की है।

हिन्दी साहित्य सम्मेलन
द्वारा प्रकाशित
पुराण साहित्य
•
(मूल-पाठ, हिन्दी अनुवाद एवं पाठान्तर सहित)
१. ब्रह्मपुराणम्
अनुवादक—श्री तारिणीश झा १५०.००
२. ब्रह्मवैवर्तपुराणम् [१, २, ३]
अनुवादक—श्री तारिणीश झा २६०.००
३. अग्निपुराणम् [१, २]
अनुवादक—श्री तारिणीश झा १५०.००
४. वायुपुराणम्
अनुवादक—पं० रामप्रताप
त्रिपाठी, शास्त्री १२०.००
मुद्रणाधीन
१. बृहन्नारदीयपुराणम् (उत्तर भाग:)
२. मत्स्यपुराणम् (पूर्व भाग:)
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प्रकाशक
हिन्दी साहित्य सम्मेलन ⊙ प्रयाग
१२, सम्मेलन मार्ग ० इलाहाबाद