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सर्वकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

पृष्ठ 304, कुल 417 में से

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पृष्ठ 304

सूत्र ३७-३९ ] अध्याय ३ २८३
होता है, वहाँ ऐसा कथन संगत नहीं होता । यहाँ इस एकताके प्रतिपादनका
प्रयोजन यही जान पड़ता है कि उपासक यदि उपासना-कालमे अपनेको
परमात्माकी भाँति देह और उसके व्यवहारसे सर्वथा असंग तथा नित्य-शुद्ध-बुद्ध-
मुक्त समझकर तद्रूप हो ध्यान करे तो वह शीघ्र ही सच्चिदानन्दघन परब्रह्म
परमात्माको प्राप्त हो जाता है ।
सम्बन्ध-पुनः प्रकारान्तरसे औपाधिक भेदकी मान्यताका निराकरण
करते हैं—
सैव हि सत्यादयः ॥ ३ । ३ । ३८ ॥
सा एव = ( परमात्मा और जीवका औपाधिक भेद तथा वास्तवमे अत्यन्त
अभेद माननेपर ) वही अनुपपत्ति है; हि = क्योकि; सत्यादयः = ( परमात्माके )
सत्यसङ्कल्पत्व आदि धर्म ( जीवात्माके नहीं माने जा सकते ) ।
व्याख्या—जैसे पूर्वसूत्रमें यह अनुपपत्ति दिखा आये हैं कि जीवात्मा और
परमात्मामें अत्यन्त अभेद होनेपर श्रुतिके व्यतिहार-वाक्यद्वारा दोनोंकी एकताका
स्थापन संगत नहीं हो सकना, वैसी ही अनुपपत्ति इस सूत्रमें भी प्रकारान्तरसे
दिखायी जाती है । कहना यह है कि परमात्माके स्वरूपका जहाँ वर्णन किया गया
है, वहाँ उसे सत्यकाम, सत्यसङ्कल्प, अपहतपाप्मा, अजर, अमर, सर्वज्ञ, सर्व-
शक्तिमान्, सबका परम कारण तथा सर्वाधार बताया गया है । ये सत्यकामत्व आदि
धर्म जीवात्माके धर्मोंसे सर्वथा विलक्षण हैं । जीवात्मामें इनका पूर्णरूपसे होना
सम्भव नहीं है। जब दोनोंमें धर्मकी समानता नहीं है, तब उनका अत्यन्त अभेद
कैसे सिद्ध हो सकता है । इसलिये परमात्मा और जीवात्माका भेद उपाधिकृत
है—यह मान्यता असंगत है ।
सम्बन्ध—यदि कहा जाय कि 'परब्रह्म परमेश्वरमें जो सत्यकामत्व आदि
धर्म श्रुतिद्वारा बताये गये हैं, वे स्वाभाविक नहीं, किन्तु उपाधिके सम्बन्धसे हैं,
वास्तवमें ब्रह्मका स्वरूप तो निर्विशेष है । अतः इन धर्मोंको लेकर जीवसे उसकी
भिन्नता नहीं बतायी जा सकती है' तो यह कथन ठीक नहीं है; क्योंकि—
कामादीतरत्र तत्र चायतनादिभ्यः ॥ ३ । ३ । ३९ ॥
( उस परब्रह्मके ) इतरत्र =दूसरी जगह ( बताये हुए ); कामादि =
सत्यकामत्वादि धर्म; तत्र च =जहाँ निर्विशेष स्वरूपका वर्णन है, वहाँ भी हैं;