सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

पृष्ठ 20, कुल 417 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 20

( २० )
सूत्र विषय पृष्ठ
१५-१६ प्रतीकोपासना करनेवालोंके सिवा अन्य सभी उपासक
ब्रह्मलोकमे जाकर संकल्पानुसार कार्यब्रह्म अथवा परब्रह्मको
प्राप्त होते हैं, यह बादरायणका सिद्धान्त ... ३६९-३७०
चौथा पाद
१-३ परब्रह्मपरायण जीवके लिये परमधाममे पहुँचकर अपने
वास्तविकस्वरूपसे सम्पन्न होने एवं सब प्रकारके बन्धनोंसे मुक्त
हो विशुद्ध आत्मरूपसे स्थित होनेका कथन ... ३७१-३७२
४-६ ब्रह्मलोकमें पहुँचनेवाले उपासकोंकी तीन गति—(१)अभिन्न-
रूपसे ब्रह्ममे मिल जाने, (२) पृथक् रहकर परमात्माके सदृश
दिव्यस्वरूपसे सम्पन्न होने तथा (३) केवल चैतन्यमात्र
स्वरूपसे स्थित होनेका वर्णन ... ३७३-३७४
७ उपासकके भावानुसार तीनो ही स्थितियोको माननेमे कोई
विरोध नहीं है, यह बादरायणका सिद्धान्त ... ३७४-३७५
८-९ प्रजापति ब्रह्माके लोकमे जानेवाले उपासकोंको संकल्पसे ही
वहाँके भोगोकी प्राप्ति ... ३७५-३७६
१० उन उपासकोंके शरीर नहीं होते; यह बादरिका मत ... ३७६
११ 'उन्हें शरीरकी प्राप्ति होती है' यह जैमिनिका मत ... ३७६
१२ संकल्पानुसार उनके शरीरका होना और न होना दोनों ही
बाते सम्भव हैं—यह बादरायणका सिद्धान्त ... ३७७
१३-१४ वे बिना शरीरके स्वप्नकी भाँति और शरीर धारण करके
जाग्रत्‌की भाँति भोगोका उपभोग करते है, यह कथन ... ३७७-३७८
१५-१६ सुषुप्ति-प्रलय एवं ब्रह्मसायुज्यकी प्राप्तिके प्रसंगमे ही नाम-
रूपके अभावका कथन ... ३७८-३७९
१७-१८ ब्रह्मलोकमे गये हुए उपासक वहाँके भोग भोगनेके उद्देश्यसे
अपने लिये इच्छानुसार शरीर-निर्माण कर सकते है, संसारकी
रचना नहीं, इसका प्रतिपादन ... ३७९-३८०
१९-२० ब्रह्मलोकमें जानेवाले मुक्तात्माको निर्विकार ईश्वररूप फलकी
प्राप्तिका कथन ... ३८१-३८२
२१ निर्लिप्तभावसे भोगमात्रमे उसे ब्रह्माकी समता प्राप्त होती
है, सृष्टिरचनामे नहीं ... ३८२
२२ ब्रह्मलोकसे पुनरावृत्ति नहीं होती, इसका प्रतिपादन ... ३८२-३८३
सूत्रोंकी वर्णानुक्रम-सूची ... ... १ से १२ (अन्तमें)