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सर्वकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

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पृष्ठ 11

ॐ श्रीपरमात्मने नमः
वेदान्त-दर्शन (ब्रह्मसूत्र) के प्रधान विषयोंकी सूची
पहला अध्याय
पहला पाद
सूत्र विषय पृष्ठ
१-११ ब्रह्मविषयक विचारकी प्रतिज्ञा तथा ब्रह्म ही जगत्‌का अभिन्न
निमित्तोपादान कारण है, जड-प्रकृति नहीं, इसका युक्ति एवं
प्रमाणोंद्वारा प्रतिपादन ... ... १-८
१२-१९ श्रुतिमें 'आनन्दमय' शब्द परमात्माका ही वाचक है, जीवात्मा
अथवा जडप्रकृतिका नहीं, इसका समर्थन ... ८-१३
२०-२१ 'विज्ञानमय' तथा 'सूर्यमण्डलान्तर्वर्ती हिरण्मय पुरुष'की
ब्रह्मरूपताका कथन ... १३-१४
२२-२७ 'आकाश', 'प्राण', 'ज्योति' तथा 'गायत्री' नामसे श्रुतिमें
परब्रह्मका ही वर्णन है, इसका प्रतिपादन ... १४-१८
२८-३१ कौषीतकि श्रुतिमें भी 'प्राण' नामसे ब्रह्मका ही उपदेश हुआ
है, इसका समर्थन ... ... १८-२१
दूसरा पाद
१-७ वेदान्त-वाक्योंमें परब्रह्मकी ही उपास्यताका निरूपण तथा
जीवात्माकी उपास्यताका निराकरण ... ... २२-२७
८ सबके हृदयमें रहते हुए भी परमात्मा जीवोंके सुख-दुःखोंका
भोग नहीं करता, इसका प्रतिपादन ... ... २७
९-१० चराचरग्राही भोक्ता परमात्मा ही हैं, इसका निरूपण ... २८
११-१२ हृदयगुहामें स्थित दो आत्मा—जीवात्मा तथा परमात्मा-
का प्रतिपादन ... ... २९-३०
१३-१७ नेत्रान्तर्वर्ती पुरुषकी ब्रह्मरूपता ... ... ३०-३४
१८ अधिदेव आदिमें अन्तर्यामी 'रूप'से ब्रह्मकी स्थिति ... ३५
१९-२० जडप्रकृति और जीवात्माकी अन्तर्यामिताका निराकरण ... ३५-३६
२१-२२ श्रुतिमें जिसे अदृश्यत्व आदि धर्मोंसे युक्त बताया है, वह ब्रह्म
है, प्रकृति या जीवात्मा नहीं; इसका प्रतिपादन ... ३७-३९
२३—रूपोपन्यासात्से ब्रह्मकारणवादका समर्थन ... ... ३९