ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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पंचदशहीनयुक्ता ६४ क्रांतिकालाद्विरसगुणाः ॥ ६५ ॥
त्रिज्यां विषुवच्छाया घातस्तच्छ्रुति विभाजितार्च्चाप्तम् ।
अक्षो नित्यं याम्यो गोलवशाद्दिग्भवेत्क्रांतिः ॥ ६६ ॥
क्रांत्य¹क्षायुति वियोगा²द्दक्षरणपदैः शोधिर्तै³दिनदलाभाः⁴ ।
भाश्रुतिकृत्योः कृतमनुयुतो नयोस्तत्पदे⁵ व्यस्ते ॥ ६७ ॥
षड्गुणितागत शेषा नाड्यो दिवसाद्धं विभाजितात् स्यात्¹ ।
दिनदलकरण²गुणाप्ता³ तया⁴ त्रिज्यया फलं कर्णः ॥ ६८ ॥
६४. चरदल विनाडिकागति कलावधात् खखरसाग्नि ३६०० लब्धकलाः ।
ऋणमुदयेऽस्तमये धनमुत्तरगोलेऽन्यथा याम्ये ॥ ६४ ॥
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(पंचदशहीनयुक्ता ॥ ६४ ॥)
६५. पंचदशहीनयुक्ताश्चरार्ध ना