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सर्वकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 705

( ३२७ )
^१व्यर्केन्दुफलाक्ताः ॥ २४ ॥
^२रविचन्द्र योग लिप्ताः ॥ २५ ॥
इति तिथ्यधिकारः ॥
अंगै रुद्रैः सिद्धैर्गजैर्जिनैरर्के वत्सरात् ॥ ६ ॥ ११ ॥ २४ ॥ ८ ॥ २४ ॥
शैलैर्विलैर्गु^२णैर^३सवह्निभिर्योज्योऽद्भौमः ॥ ७ ॥ ६ ॥ ३२ ॥ २६ ॥
^१शशिनोक्षितैः शराविरंकैः षड्वह्निभिर्हृतानंदान् ।
शशिनाद्रियै^२मेश्चतुरविभिर्दिनैर्यु^३तं भवति बुधशीघ्रम् ॥ २७ ॥
रूपैर^१गैः खेनकुयमै^२र्रं^३गैर्न^४भसावकररणव्यब्दात् ।
गुणिता युक्ता वैदैः^५ कुयमैस्त्रियर्मैर्गु णौश्च गुरुः ॥ २८ ॥
२४. (ङ) १. रविचन्द्र योगलिप्ताः खखवसुभिर्भाजिताः फलं योगः ।
गतगम्ये षष्टिगुणे