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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 679

( २९५ )
यात्यूदयं¹ मेषाद्या यत²स्त⁵स्त³दुदयानकालसमाः ।
क्रांतिवशालं⁴कायां तदूनताधिक्यमक्ष⁶वशात् ॥ ६० ॥
क्षितिजोन्मण्डलयोर्यत्स्वाहो³रात्रांतरं¹ चरदलं तत् ।
क्षितिजेग्राप्राच्यपरं स्वाहोरात्रांतरां²शज्या ॥ ६१ ॥
स्वाहोरात्रे क्षितिजां¹द् दिनगतशेषो²न्नतारवेः³ शंकुः ।
तस्माद्⁵ दिनगतशेषं शंकु कुमध्यांतरं दृग्ज्या⁴ ॥ ६२ ॥
दृग्मंडले नतां¹शज्या दृग्ज्या शंकूरुन्नतांशज्या ।
अर्को⁵दयास्तसूत्रा³द्दिनशंकोःदक्षिणो² नृतलम्⁴ ॥ ६३ ॥
क्षितिजे भू²दललिप्ताः कक्ष्यायां दृ³ग्गतिर्नभो मध्यात् ।
अवनति लिप्ता याम्योत्तरार्क ग्रहवदन्यतः⁴ ॥ ६४ ॥

६०. (घ) यांत्युदयं (ग) यात्युदयं (