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सर्वकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 673

( २८६ )
तद्भावे² होमजपः³ स्नानादि⁴ फलस्य⁵ चाभावः ।⁷
राहुक्रतं¹ ग्रहणद्वय मागोपालांगनादि⁶ सिद्धमिदम् ॥ ४० ॥⁸
बहुफलमिदमपि¹ सिद्धं जपहोमस्नानफलमत्र² ।
स्मृतीषूक्तं³ न स्नानं राहोरन्यत्र दर्शनाद्रात्रौ ॥ ४१ ॥
राहुग्रस्ते सूर्ये¹ सर्वं गंगासमं तोयम्² ।
स्वर्भानुरास्तुरिरिनं³ तमसा वित्याधवेदवाक्यमिदम्⁴ ॥ ४२ ॥

४०. (घ) (वि०—यहाँ प्रथम पंक्ति के अन्त में ४० संख्या दी है)
१. कृतं (ग) for (क्रतं)
(ग) २. तदभावो for (तद्भावे) ३. लुप्त पद है । ४. लुप्त पद है ।
५. फलस्याभावः ॥ ४१ ॥ for (फलस्य चाभावः)
(वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध, अगले श्लोक का पूर्वार्ध है)
६. माग्गो पा