ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २६० )
यैरूनो यैश्चयुतो रूपैर्वर्ग¹स्तदैक्यमिष्टहूतम्² ।
इष्टोनं तद्दलकृतिरूनाभ्यधिका भवन्ति³ राशिः⁴ ॥ ८० ॥⁵
याभ्यां कृतिराधिकोनस्तदंतरं हूत³युतो न मिष्टेन ।
तद्दलकृतिराधिके¹ न्यूनाभ्यधि⁵ भवति राशि² ॥ ८१ ॥⁷
ज्ञदिनेऽर्कं¹ कलाशेषं गुरू दिन²विकलावशेष युक्तोनम् ।
वर्गोविधं³ च संकं कुर्वन्नावत्सराद् गणकः ॥ ८२ ॥⁴
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८०. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ८१ है)
१. वर्गं (ग) (ङ) for (वर्ग) २. हृतं (ग) (ङ) for (हूतम्)
३. भवति (ग) (च) (ङ) for (भवन्ति)
४, राशिम् (च) for (राशि:)