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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 548

( १६२ )
आयतकर्णौ⁵ बाहु भुज॑कृतिरिष्टेन भाजितेष्टोना ।
द्वि²हृता कोट्यधिकाभूर्मुख³मूलानाद्विसमचतुरस्रे⁴ ॥ ३६ ॥
कर्ण¹कृतिस्त्रिसमभूजास्त्रयश्चतुर्थो विशोध्य कोटिकृति³ ।
बाहुकृतेस्त्रिगुणार्या⁴ यद्यधिकोभूर्मुखं हीनः ॥ ३७ ॥
जात्यद्वयकोटिभुजाः परकर्णगुणाः भुजाश्चतुर्विषमे ।
अधिकोभूर्मुखमूना बाहु द्वितयं भुजावन्यौ ॥ ३८ ॥
इष्टगुणाकारगुणितो गिर्युच्छ्रयः पुरांतरमनष्टम् ।
द्वियुतं गुणाकरभाजितमुत्पातोऽन्यस्य समगत्योः³ ॥ ३९ ॥
व्यासव्यासार्द्धकृति¹परिधिफले व्यासंहारिके² त्रिगुणे ।
तद्वर्गाभ्यां³ दशभिः संगुणिताभ्यां पदे सूक्ष्मे⁴ ॥ ४० ॥

३६. (घ) १. बाहू (ङ) for (बाहु) २. हृ