सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 539, कुल 737 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 539

( १५३ )
अथ गणिताध्यायः
द्वादशः
परिकर्म^६ विंशति^१ यः संक(^२व)लिताद्यं पृथक्^३ विजानाति ।
अष्टौ च व्यवहारान्^४ छायातान्^५ भवति गणकः सः ॥ १ ॥
विपरीत छेदगुणाः^२ राश्योः^३ छेदांशकाः समछेदाः ।
संकलितेशा^१ योज्या व्यवकलितेशांतंर कार्यम् ॥ २ ॥
रूपाणि छेदगुणान्यंशयुतानि द्वयोर्बंहूनां^१ वा ।
प्रत्युत्पन्नो^३ भवति छेदवधेनो^२द्धृतांशवधः ॥ ३ ॥
प्रत्युत्पन्नः परिवर्त्य^५ भागहारछेदांशौ^७ छेदसंगुणच्छेदः^१ ।
अंशांशगुणो भाज्यस्य^२ भागहारः^६ सवर्णितयोः^३ मागहारः^४ ॥ ४ ॥

१. (घ) १. विशांति (ग) for (विंशति) २. संकलिताद्यां (ग) (च) for (संकलिताद्यं)
३. पृथग्विजानाति (ग) (च) for (पृथक् विजानाति)
[L