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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 467

( ८१ )
यद्यधिकं स्थित्यर्द्धं तदन्तरेणान्यथोनमृणमेकम् ।
अन्यद्धनं तदेक्येनाधिकमेवं¹ विमर्द्दार्द्धः² ॥ १५ ॥
स्फुटतिथ्यंता⁴ल्लम्बन²मसकृत्³स्थित्यर्थहीनयुक्ताद्वा ।
तत्स्फुटविक्षेपकृति¹स्थित्यर्द्धोनयुततिथ्यन्ते ॥ १६ ॥
तत्स्पष्ट³तिथिच्छेदांतरे स्फुटे तिथिर्दले¹ विहीनयुतात् ।
स्वविमर्दार्द्धे⁵नाऽसकृदेवं स्पष्टो² विमर्दार्द्धः⁴ ॥ १७ ॥
शशिवद्वाहुः⁵ स्फुटविक्षेपकृतं¹ स्थितिदलेन संगुणिता³ ।
स्पष्टः⁶ स्थित्यर्थहतो² भवति भुजः पूर्ववच्छेषम्⁴ ॥ १८ ॥

१५. (घ) तदैक्येनाधिकमेवं (ग) (च) for (तदेक्येनाधिकमेवं)
(क) २. विमर्दार्द्धे (च) for (विमर्दार्द्धः)
१६. (घ) १.