सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 464, कुल 737 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 464

( ७८ )
दृग्गणितैक्यं¹ न² भवति यस्मात्पंचज्यया रविग्रहणे ।
यस्माद्यथा³ तदैक्यं तथा प्रवक्ष्यामि तिध्यन्ते ॥ १ ॥
वित्रिभलग्न¹समेऽर्के⁴न लम्बनं तदधिकोनके भवति ।
तत्संक्रांति³ ज्योदक्² यदाक्षजीवा समा न तदा ॥ २ ॥
अवनतिरतोऽन्यथा भवति संभवेत्तदुदयै¹र्विलग्नसमं² कृत्वा⁵ ।
तदुदितघटिकातः छंकुस्³तच्चरप्राणैः⁴ ॥ ३ ॥
त्रिज्याकृते¹ चतुर्गुणशंकुहताया² फलेन भक्तायाः ।
तात्कालिकार्कराशित्रयोनलग्नान्तरज्याया⁴ ॥ ४ ॥
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
१. (घ) १. दृग्दणितैक्यं (च) for (दृग्गणितैक्यं)
(ग) ३. तस्माद्यथा for (यस्माद्यथा)
(क) २. 'न' पद लुप्त है ।
३. तस्माद्यथा for (यस्माद्यथा)
२. (घ) १. वित्रिग्नसमे for (वित्रिभलग्नसमे)
२. द्योदक् (ग) ज्योदग (क) ज्यादक् for (ज्योदक्)
(ग) ३. तत्स्वक्रांति (क) तन् खक्रान्ति for (तत्संकान्ति)
(च) ४. र्के न for (ऽर्केन) ३ तत्सक्रांतिस्योदक् for (तत्संकान्तिज्योदक्)
३. (घ) १. स भवे तदुदयै (ग) संभवेत्तदुयै (क) संभवेत्तदुदयै for (संभवेत्तदुदयै)
२. विलग्न समं for (विलग्नसमं)
३. घटिकात्तर्छंकुस् (ग) घटिकास्त छंकुं (क) घटिकास्तच्छंकुस् for (घटिकातः
छंकुस्)
(क) ५. 'कृत्वा' यह पद पूर्वार्ध का अंतिम न होकर उत्तरार्ध का आरम्भिक है (च)
४. (घ) १. कृतेश्चतुर्गुण (ग) कृतेश्चतुर्गुणं १०६६२६०० for (कृते चतुर्गुणं)
२. हृताया (ग) हृतायाः (च) हृताया for (हताया)
३. राशित्रं for (राशित्र)
४. लग्नांन्तरज्यायाः (च) for (लग्नान्तरज्यायाः)
(क) १. कृतेः रचतुर्गुण for (कृते चतुर्गुण)
(च) १. कृतेश्चतुर्गुण for (कृतेचतुर्गुण)