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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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६२ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

अन्ये तेभ्योऽपरिज्ञाता ह्रस्वाः स्वल्पोपजीविनः ॥२३
तैर्विमिश्रा जनपदा आर्या म्लेच्छाश्च भागशः ।
पीयन्ते यैर्रिमा नद्यो गंगा सिंधुः सरस्वती ॥२४
शतद्रुश्चंद्रभागा च यमुना सरयूस्तथा ।
इरावती वितस्ता च विपाशा देविका कुहूः ॥२५
गोमती धूतपापा च बुद्बुदा च दृषद्वती ।
कौशिकी त्रिदिवा चैव निष्ठीवी गंडकी तथा ॥२६
चक्षुर्लोहित इत्येता हिमवत्पादनिस्सृताः ।
वेदस्मृतिर्वेदवती वृत्रघ्नी सिंधुरेव ॥२७
कर्णाशा नंदना चैव सदानीरा महानदी ।
पाशा चर्मणवतीनूपा विदिशा वेत्रवत्यपि ॥२८

तुङ्गप्रस्थ—कृष्णगिरि—गोधनगिरि—पुष्प गिरि—उज्जयन्त तथा श्वेतक शैल है ।२२। श्री पर्वत—चित्रकूट—कूट शैल गिरि हैं । उनसे भी अन्य छोटे-छोटे गिरि हैं जो भली-भाँति परिज्ञात नहीं हे और स्वल्पोप जीवी है ।२३। उन शैलों से मिले-जुले जनपद यह भी हैं जिनके भागों में आर्य तथा म्लेच्छ निवास किया करते हैं जिनके द्वारा इन नदियों का पान किया जाया करता है । उन नदियों के कुछ नामों का परिगणन किया जाता है जैसे— गङ्गा—सिन्धु—और सरस्वती हैं ।२४। शतद्रु—चन्द्रभागा—जमुना—सरयू—इरावती—वितस्ता—विपाशा—देविका—कुहू है ।२५। गोमती—धूतपापा—बुद्बुदा—दृषद्वती—कौशिकी—त्रिदिवा—निष्ठीवी—गण्डकी—चक्षु—लोहित—ये सब नदियाँ हिमवान् महाशैल के पाद से निकली हैं । वेदस्मृति—वेदवती—वृत्रघ्नी और सिन्धु है । वर्णाशा—नन्दना—सदानीरा—महानदी—पाशा—चर्मणवती—नूपा—विदिशा—वेत्रवती है ।२६-२८।

क्षिप्रा ह्यवंति च तथा पारियात्राश्रयाः स्मृताः ।
शोणो महानदश्चैव नर्म्मदा सुरसा क्रिया ॥२६
मंदाकिनी दशार्णा च चित्रकूटा तथैव च ।
तमसा पिप्पला श्येना करमोदा पिशाचिका ॥३०
चित्रोपला विशाला च बंजुला वास्तुवाहिनी ।